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Health Alert: रंगीन पापड़ में छिपा है सेहत का खतरा? खरीदने से पहले पढ़ें ये खबर
Tue, 21 Jul 2026 05:13 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 21 Jul 2026 05:13 PM IST
सार
Food Safety: बाजार में आजकल रंगीन पापड़ खूब मिलते हैं। इन्हें खाना कितना सही है और कितना गलत.. आइए इस बारे में जानते हैं।
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रंगीन पापड़ खाना कितना खतरनाक?
- फोटो : AI
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Food Safety: पापड़ भारतीय खाने का एक लोकप्रिय हिस्सा है और लगभग हर घर में इसे बड़े चाव से खाया जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बाजार में लाल, हरे, पीले और नारंगी जैसे चमकीले रंगों वाले पापड़ भी तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। देखने में आकर्षक लगने वाले ये रंगीन पापड़ बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आते हैं। हालांकि, सवाल यह है कि क्या ये रंगीन पापड़ स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं?
रंगीन पापड़ खाना कितना खतरनाक?
- फोटो : AI
रंगीन पापड़ खाना कितना सुरक्षित है?
रंगीन पापड़ अपने आकर्षक रंगों की वजह से लोगों का ध्यान खींचते हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि इनमें इस्तेमाल किए गए रंग और अन्य सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि पापड़ में केवल स्वीकृत फूड कलर का सीमित मात्रा में उपयोग किया गया है, तो सामान्य तौर पर उनका सेवन सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन अगर इनमें गैर-मानक या अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग मिलाए गए हों, तो स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रंगीन पापड़ अपने आकर्षक रंगों की वजह से लोगों का ध्यान खींचते हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि इनमें इस्तेमाल किए गए रंग और अन्य सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि पापड़ में केवल स्वीकृत फूड कलर का सीमित मात्रा में उपयोग किया गया है, तो सामान्य तौर पर उनका सेवन सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन अगर इनमें गैर-मानक या अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग मिलाए गए हों, तो स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रंगीन पापड़ खाना कितना खतरनाक?
- फोटो : AI
रंगीन पापड़ खाने के संभावित नुकसान
1. एलर्जी की समस्या
कुछ कृत्रिम फूड कलर संवेदनशील लोगों में त्वचा पर खुजली, रैशेज, आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी जैसी एलर्जी पैदा कर सकते हैं।
2. पाचन संबंधी दिक्कत
अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग और प्रिजर्वेटिव वाले पापड़ खाने से गैस, पेट दर्द, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. बच्चों की सेहत पर असर
कुछ शोध बताते हैं कि कुछ कृत्रिम फूड कलर संवेदनशील बच्चों में अति सक्रियता और व्यवहार संबंधी बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है।
4. ज्यादा सोडियम का खतरा
अधिकांश पैक्ड पापड़ों में नमक की मात्रा अधिक होती है। लगातार ज्यादा सोडियम लेने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।
1. एलर्जी की समस्या
कुछ कृत्रिम फूड कलर संवेदनशील लोगों में त्वचा पर खुजली, रैशेज, आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी जैसी एलर्जी पैदा कर सकते हैं।
2. पाचन संबंधी दिक्कत
अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग और प्रिजर्वेटिव वाले पापड़ खाने से गैस, पेट दर्द, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. बच्चों की सेहत पर असर
कुछ शोध बताते हैं कि कुछ कृत्रिम फूड कलर संवेदनशील बच्चों में अति सक्रियता और व्यवहार संबंधी बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है।
4. ज्यादा सोडियम का खतरा
अधिकांश पैक्ड पापड़ों में नमक की मात्रा अधिक होती है। लगातार ज्यादा सोडियम लेने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।
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रंगीन पापड़ खाना कितना खतरनाक?
- फोटो : AI
पापड़ खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
- हमेशा भरोसेमंद ब्रांड का पापड़ खरीदें
- पैकेट पर सामग्री और FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें
- बहुत ज्यादा चमकीले या अस्वाभाविक रंग वाले पापड़ों से बचें
- तले हुए की बजाय भुने हुए पापड़ को प्राथमिकता दें
- बच्चों को सीमित मात्रा में ही रंगीन पापड़ दें
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रंगीन पापड़ खाना कितना खतरनाक?
- फोटो : AI
क्या रंगीन पापड़ पूरी तरह छोड़ देने चाहिए?
जरूरी नहीं। यदि पापड़ मानक के अनुसार बने हों और उनका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए, तो आमतौर पर वे संतुलित आहार का कभी-कभार हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन बहुत अधिक रंग, नमक और तेल वाले पापड़ों का नियमित सेवन करने से बचना बेहतर है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।