Medically Reviewed by Dr. Ambika Prasad Yadav
भारतीय रसोई में मसालों की कोई कमी नहीं है। एक से बढ़कर एक ऐसे मसाले हैं, जो जड़ी-बूटी का काम करते हैं और ये मसाले स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होते हैं। दरअसल, खाने में कुछ मसालों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है कि वो इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कुछ मसाले बेहद ही फायदेमंद होते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल (नियंत्रण) में रहे, क्योंकि शुगर लेवल का बढ़ना बहुत ही खतरनाक साबित होता है। इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि आहार में अगर कुछ मसालों को शामिल किया जाए तो शुगर लेवल को नियंत्रण में रखा जा सकता है। आइए जानते हैं ब्लड शुगर कंट्रोल करने में कौन-कौन से मसाले उपयोगी साबित हो सकते हैं?
सलाह: ब्लड शुगर कंट्रोल करने में बहुत कारगर हैं रसोई में रखे ये मसाले, डाइट में जरूर करें शामिल
लौंग
- लौंग के औषधीय गुण सिर्फ पाचन शक्ति को ही मजबूत नहीं बनाते हैं, बल्कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि डायबिटीज के मरीज अगर लौंग के पानी का सेवन करें तो इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।
काली मिर्च
- यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लोकप्रिय मसालों में से एक है। इसे 'मसालों का राजा' यूं ही नहीं कहा जाता है। इसके सेवन से न केवल पाचन शक्ति बढ़ती है, बल्कि यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में भी उपयोगी होती है।
दालचीनी
- विशेषज्ञ कहते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए दालचीनी किसी वरदान से कम नहीं है। यह ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में शरीर की मदद करता है। डायबिटीज के मरीजों को इसे अपने दैनिक आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। दालचीनी वाले दूध को भी शुगर लेवल यानी शर्करा का स्तर नियंत्रण में रखने का एक आसान घरेलू उपाय माना जाता है।
मेथी दाना
- मेथी के बीज को डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद ही फायदेमंद माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले गुण ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हैं। आप खाली पेट मेथी का पानी पी सकते हैं या उसे चबाकर भी खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि मेथी के बीजों का सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
नोट: डॉ. अंबिका प्रसाद यादव, वाराणसी के उजाला सिग्नस अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन, डायबिटीज और हाइपरटेंशन कंसल्टेंट हैं। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से मेडिसिन में एमबीबीएस और एमडी किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।