कोविड-19 के वैश्विक स्तर पर बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी लोगों से लगातार विशेष सावधानी बरतते रहने की अपील की जा रही है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि इस समय दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट और उसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामलों में तेज उछाल देखा जा रहा है। कोरोना के इन वैरिएंट्स को अपेक्षाकृत अधिक संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है।
Covid-19: कुत्ते भी सूंघकर बता सकते हैं, आपको कोरोना है या नहीं? RT-PCR जितना सटीक परिणाम, अध्ययन में बड़ा दावा
कोविड-19 का पता लगाने के लिए कुत्तों की ट्रेनिंग
अब तक हवाई अड्डों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ड्रग्स और संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाने के लिए ट्रेन्ड कुत्तों की मदद ली जाती रही है। कुत्तों में इसी क्षमता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों की टीम ने सूंघकर कोविड-19 का पता लगाने के लिए कुत्तों को ट्रनिंग देने की शुरुआत की है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब बीमारी की पता लगाने में कुत्तों की मदद लेने की पहल की जा रही है, इससे पहले मिर्गी के दौरे, कैंसर और पार्किंसंस जैसे समस्याओं का पता लगाने के लिए भी कुत्तों के सूंघने की क्षमता को प्रयोग में लाया जाता रहा है।
अध्ययन में क्या पता चला?
कुत्तों में सूंघने की क्षमता विकसित कर कोरोना का पता लगाने के लिए फिनलैंड स्थित हेलसिंकी विश्वविद्यालय ने कुत्तों को ट्रेन्ड करने की शुरुआत की। शोधकर्ताओं ने बताया कि कुत्तों की दो प्रजातियां- लैब्राडोर रिट्रीवर्स और व्हाइट सेफर्ड आसानी से सूंघकर 97 प्रतिशत सकारात्मकता के साथ संक्रमण की पुष्टि कर सकते हैं।
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने सितंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच हेलसिंकी-वंता अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले 303 रैंडम यात्रियों को कुत्तों ने सुंघाकर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव या निगेटेवि होने के संकेत प्राप्त किए। इन सभी का पहले से पीसीआर परीक्षण भी हो चुका था।
सटीकता से संक्रमण का पता लगा सकते हैं कुत्ते
बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के परिणाम में वैज्ञानिकों ने बताया कि कुत्तों ने जिन 303 यात्रियों को सूंघा था उनमें से 296 का आरटीपीसीआर निगेटिव था, जिसका कु्त्तों नें सूंघकर पता लगा लिया। केवल तीन यात्रियों को खोजने में कुत्ते विफल रहे। शोधकर्ताओं का कहना है कि आरटीपीसीआर टेस्ट और कुत्तों के संकेत 98 फीसदी तक मैच करते हैं। कुत्तों को कोरोना के नए वैरिएंट्स की पहचान करने के लिए भी ट्रेन्ड किया जा रहा है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोध के परिणाम के बारे में हेलसिंकी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रोफेसर अनु कांटेले कहती हैं, हवाई अड्डों पर ही अगर बाहर से आने वाले लोगों की जांच कर ली जाए तो कई प्रकार के संक्रामक रोगों को एक देश से दूसरे देश में प्रसारित होने से रोका जा सकता है। कोरोना संक्रमण के मामले में कुत्तों को प्रशिक्षित करके इस दिशा में सरलता से काम किया जा सकता है। हमारे अब तक के परिणाम काफी उत्साहवर्धक हैं। यह निश्चित ही आने वाले समय में रोग के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद करने वाला तरीका साबित होगा।
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स्रोत और संदर्भ
Scent dogs in detection of COVID-19: triple-blinded randomised trial and operational real-life screening in airport setting
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