Diabetes Related Myths: आज के दौर में डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य चुनौती है जो भारत में लगभग 10 करोड़ लोगों को प्रभावित कर चुकी है। यह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर का ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी, उचित जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
Diabetes Tips: डायबिटीज से जुड़े इन मिथकों को कहीं आप भी तो नहीं मानते हैं सच, जान लें हकीकत
डायबिटीज एक बेहद गंभीर बीमारी है जिससे हमारे देश में बहुत से लोग परेशान हैं। डायबिटीज से जुड़ी कई मिथक हैं जो हमारे समाज में प्रचलित हैं, जिसकी सच्चाई आपको जरूर जाननी चाहिए। आइए इस लेख में जानते हैं।
मिथक 1: डायबिटीज केवल चीनी खाने से होता है
कई लोग मानते हैं कि सिर्फ चीनी या मिठाई खाने से डायबिटीज होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डायबिटीज एक जटिल बीमारी है, जो आनुवंशिकता, मोटापा, गतिहीन जीवनशैली और तनाव जैसे कई कारणों से भी हो सकता है। अधिक चीनी खाना टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को जरूर बढ़ा सकता है, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है। यही वजह है कि इससे बचने के लिए डॉक्टर भी सुझाव देते हैं कि संतुलित आहार लें जिसमें साबुत अनाज, फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ शामिल हों।
ये भी पढ़ें- Kidney Stone: आपकी इन गलत आदतों की वजह से किडनी में हो सकती है पथरी, आज से ही रखें विशेष ध्यान
मिथक 2: डायबिटीज रोगी मीठा बिल्कुल नहीं खा सकते
लोग सोचते हैं कि डायबिटीज होने पर सभी मीठे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना जरूरी है, यह बात कुछ हद तक सही है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। डायबिटीज रोगी सीमित मात्रा में प्राकृतिक मिठास, जैसे फल (जामुन, सेब) या गुड़, खा सकते हैं, बशर्ते ब्लड शुगर लेवल का ध्यान रखने की जरूरत होती है। अगर डायबिटीज की दवा खा रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इन चीजों को डाइट में शामिल करें। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ, जैसे मिठाइयां और कोल्ड ड्रिंक से बचना चाहिए।
ये भी पढ़ें- Health Alert: मानसून अपने साथ लाता है मच्छर जनित रोगों का खतरा, हजारों लोग होते हैं प्रभावित; आप कैसे बचें?
मिथक 3: डायबिटीज केवल मोटे लोगों को होता है
एक आम धारणा है कि सिर्फ अधिक वजन वाले लोग ही डायबिटीज के शिकार होते हैं। हालांकि मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का एक प्रमुख कारण जरूर है, लेकिन पतले लोग भी आनुवंशिकता, तनाव या हार्मोनल असंतुलन के कारण डायबिटीज का शिकार हो सकते हैं। टाइप-1 डायबिटीज का वजन से कोई संबंध नहीं है।
कुछ लोग मानते हैं कि डायबिटीज रोगी व्यायाम से बचना चाहिए, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकता है। बता दें कि व्यायाम डायबिटीज प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सप्ताह में 150 मिनट मध्यम तीव्रता का व्यायाम, जैसे तेज टहलना या योग, इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। आप डॉक्टर से सलाह लेकर व्यायाम कर सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।