Monsoon And Disease: देश के अधिकतर हिस्सों में मानसून की शुरुआत हो चुकी है। कई राज्यों में तेज बारिश का भी असर देखा गया है। मानसून का ये मौसम तेज गर्मी के बाद राहत देने वाला तो होता है पर अपने साथ कई प्रकार की बीमारियां भी लेकर आता है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए।
Health Alert: मानसून अपने साथ लाता है मच्छर जनित रोगों का खतरा, हजारों लोग होते हैं प्रभावित; आप कैसे बचें?
- मानसून भले ही राहत और ठंडक लेकर आता हो, लेकिन यह बीमारियों का मौसम भी बन जाता है। साफ-सफाई, जागरूकता और थोड़ी सी सावधानी से आप इन मौसमी रोगों से खुद और अपने परिवार को बचा सकते हैं।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट के डॉक्टर अभिजात सिंह बताते हैं, मानसून भले ही राहत और ठंडक लेकर आता हो, लेकिन यह बीमारियों का मौसम भी बन जाता है। साफ-सफाई, जागरूकता और थोड़ी सी सावधानी से आप इन मौसमी रोगों से खुद और अपने परिवार को बचा सकते हैं। जल-जमाव के कारण मच्छरों का प्रजनन बढ़ जाता है, यही कारण है कि अगस्त से अक्तूबर तक के महीनों में अस्पताल में डेंगू-मलेरिया और चुकनगुनिया जैसी बीमारियों का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
इन बीमारियों से बचाव के लिए सभी लोगों को पहले से सतर्क रहना चाहिए।
डेंगू का खतरा
डेंगू एडीज एजिप्टाई नामक मच्छर के काटने से होता है, जो दिन में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। ये मच्छर साफ जमा पानी (जैसे कूलर, गमले, टंकी) में पनपते हैं। डेंगू के कारण तेज बुखार (104°F तक), सिर, आंखों के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द होता है, यही कारण है कि इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं।
इन लक्षणों के अलावा डेंगू के स्थिति में त्वचा पर लाल चकत्ते, उल्टी या मतली की भी दिक्कत होती है। अगर समय पर इलाज न हो तो ब्लड प्लेटलेट्स काउंट तेजी से कम हो सकता है जिससे रक्तस्राव और डेंगू हेमोरेजिक फीवर का भी खतरा हो सकता है। ये स्थिति जानलेवा मानी जाती है।
मलेरिया का न हो जाएं शिकार?
डेंगू की ही तरह से मानसून के दिनों में मलेरिया रोग के मामले भी काफी बढ़ जाते हैं। ये एनॉफिलीज मादा मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर आमतौर पर गंदे पानी में पनपते हैं और डेंगू के मच्छरों से उल्टा, रात में ज्यादा काटते है। मलेरिया प्लास्मोडियम नाम के परजीवी से होता है, जो खून में पहुंचकर लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
मलेरिया के कारण बुखार के साथ ठंड लगने और पसीना आना (थरथराहट के साथ), सिर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान की दिक्कत देखी जाती है। अगर बीमारी का इलाज न हो पाए औ ये गंभीर रूप ले लेता है तो इससे दिमाग, किडनी और लिवर की भी समस्याएं हो सकती हैं।
चिकनगुनिया को लेकर सावधानी जरूरी
चिकनगुनिया भी एडीज मच्छर, विशेष रूप से एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के काटने से होता है। यह दिन में ज्यादा सक्रिय रहता है और साफ पानी में पनपता है। चिकनगुनिया के भी अधिकतर लक्षण डेंगू से मिलता-जुलते हो सकते हैं। इसके कारण अचानक तेज बुखार आने, जोड़ों में तेज दर्द होने, शरीर पर चकत्ते के साथ सिर दर्द और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
इन बीमारियों से बचाव कैसे करें?
मानसून के दिनों में कुछ बातों का ध्यान रखकर इन बीमारियों से बच सकते हैं। इसके लिए घर के आसपास (कूलर, बर्तन, गमले) पानी इकट्ठा न होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का प्रयोग करें। सुबह-शाम घर के कोनों में कीटनाशक छिड़कें। इसके अलावा बुखार आने पर या फिर सामान्य दवाओं से आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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