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Hindi News ›   Lifestyle ›   Antyodaya Diwas 2026 Kab Hai History, Purpose and Significance Pandit Deendayal Upadhyaya Jayanti

अंत्योदय दिवस 2026: क्या है अंत्योदय दिवस और क्यों है यह दिन खास? जानिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय से इसका संबंध

Wed, 23 Sep 2026 05:22 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 23 Sep 2026 05:22 PM IST
सार

Antyodaya Diwas 2026 : अंत्योदय शब्द का सामान्य अर्थ है, अंतिम व्यक्ति का उदय, यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास और अवसरों का लाभ पहुंचाना। यह विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक और आर्थिक चिंतन से जुड़ा है। सरकारी दस्तावेजों में उनके अंत्योदय दर्शन को अंतिम व्यक्ति के उत्थान और समाज के व्यापक कल्याण से जोड़ा गया है। 

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Antyodaya Diwas 2026 Kab Hai History, Purpose and Significance Pandit Deendayal Upadhyaya Jayanti
अंत्योदय दिवस - फोटो : AI

विस्तार

deendayal upadhyaya jayanti: भारत में कई ऐसे दिवस हैं, जिनके पीछे किसी विचार, व्यक्तित्व या सामाजिक उद्देश्य की कहानी जुड़ी है। अंत्योदय दिवस भी ऐसा ही एक दिन है, जो समाज के उस व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुंचाने की अवधारणा को सामने रखता है, जो सबसे पीछे या वंचित स्थिति में है। हर साल 25 सितंबर को अंत्योदय दिवस मनाया जाता है। यह दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। भारत सरकार ने 25 सितंबर 2014 को उनकी 98वीं जयंती के अवसर पर इस दिन को अंत्योदय दिवस के रूप में घोषित किया था। 

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अंत्योदय शब्द का सामान्य अर्थ है, अंतिम व्यक्ति का उदय, यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास और अवसरों का लाभ पहुंचाना। यह विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक और आर्थिक चिंतन से जुड़ा है। सरकारी दस्तावेजों में उनके अंत्योदय दर्शन को अंतिम व्यक्ति के उत्थान और समाज के व्यापक कल्याण से जोड़ा गया है। 
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अंत्योदय दिवस केवल किसी व्यक्ति की जयंती को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि समान अवसर, सामाजिक कल्याण और जरूरतमंद लोगों तक विकास के लाभ पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा का भी अवसर देता है।
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अंत्योदय दिवस कब मनाया जाता है?

अंत्योदय दिवस हर साल 25 सितंबर को मनाया जाता है। यह तारीख पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से जुड़ी है। उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। भारत सरकार के प्रकाशनों में उन्हें अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, लेखक और पत्रकार के रूप में भी वर्णित किया गया है। 

वर्ष 2014 में उनकी 98वीं जयंती के अवसर पर 25 सितंबर को अंत्योदय दिवस घोषित किया गया। इसी दिन ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपने कौशल विकास कार्यक्रम आजीविका स्किल्स को पुनर्गठित कर दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) के रूप में शुरू किया। 


अंत्योदय दिवस का इतिहास क्या है?

अंत्योदय दिवस का वर्तमान स्वरूप वर्ष 2014 से जुड़ा है। 25 सितंबर 2014 को केंद्र सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को अंत्योदय दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। उसी दिन सरकार ने शहरी और ग्रामीण गरीबों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने और कौशल विकास पर केंद्रित दीन दयाल अंत्योदय योजना (DAY) की भी घोषणा की थी। 

इसके शहरी और ग्रामीण घटकों के माध्यम से गरीब परिवारों की आजीविका और कौशल विकास से संबंधित कार्यक्रमों को बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया था। 2014 की सरकारी घोषणा में शहरी और ग्रामीण गरीबों के लिए कौशल विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया गया था। 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अंत्योदय का नाता

पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति और विचार जगत से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व थे। सरकारी प्रकाशनों में उनके विचारों को एकात्म मानववाद और अंत्योदय की अवधारणा से जोड़ा गया है। अंत्योदय का मूल भाव समाज के उस व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का है, जो सबसे अधिक जरूरतमंद और वंचित है। 

उनके विचारों में व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के विकास को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया। अंत्योदय की अवधारणा में आर्थिक विकास का उद्देश्य केवल समृद्धि बढ़ाना नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया में अंतिम व्यक्ति की भागीदारी और उसके जीवन में सुधार से भी जुड़ा माना जाता है।

अंत्योदय दिवस का उद्देश्य क्या है?

1. अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना

अंत्योदय की अवधारणा का मुख्य केंद्र समाज के अंतिम पायदान पर मौजूद व्यक्ति है। इसका उद्देश्य यह विचार सामने रखना है कि विकास का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।

2. गरीब और वंचित वर्गों के लिए अवसर

शिक्षा, कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक पहुंच सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। DDU-GKY जैसे कार्यक्रमों में ग्रामीण गरीब युवाओं के कौशल विकास और रोजगार से जुड़ाव पर जोर दिया गया है। 

3. आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना

अंत्योदय से जुड़ी योजनाओं में केवल सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ कौशल और आजीविका के अवसरों के माध्यम से लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर भी जोर दिया गया है। DDU-GKY को ग्रामीण गरीब युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण के कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया। 

4. सामाजिक कल्याण की भावना

अंत्योदय दिवस समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के प्रति जिम्मेदारी और कल्याण की भावना को रेखांकित करता है। इसका व्यापक विचार यही है कि विकास का मूल्यांकन केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जाए कि उसका लाभ समाज के वंचित वर्गों तक कितना पहुंचता है।


अंत्योदय दिवस और दीन दयाल अंत्योदय योजना में क्या अंतर है?

इन दोनों को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा। अंत्योदय दिवस एक स्मरण और जागरूकता दिवस है, जो 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। वहीं दीन दयाल अंत्योदय योजना (DAY) सरकारी योजनाओं का एक कार्यक्रमगत ढांचा है, जिसका उद्देश्य गरीबों के लिए आजीविका और कौशल विकास के अवसरों को बढ़ाना रहा है। 2014 में इसकी घोषणा शहरी और ग्रामीण गरीबों के उत्थान के लिए की गई थी। 


आज के समय में अंत्योदय दिवस का महत्व

आज अंत्योदय दिवस का महत्व इस सवाल से जुड़ता है कि विकास का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक किस तरह पहुंचता है। शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच जैसे मुद्दे सीधे तौर पर कमजोर और वंचित वर्गों के जीवन से जुड़े हैं।


इस दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और उनके अंत्योदय दर्शन पर चर्चा की जाती है। साथ ही गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को रेखांकित किया जाता है।
 

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