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Diwali 2025: इन लोगों को पटाखों से रहना चाहिए कोसों दूर, वरना ट्रिगर हो सकती हैं आपकी बीमारी

Sun, 19 Oct 2025 08:57 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 19 Oct 2025 08:57 PM IST
सार

दिवाली दिया, पटाखे और मिठाइयों का त्योहार है। कुछ लोगों को लिए ये पटाखे बहुत नुकसानदायक हो सकते हैं और बीमारियों को ट्रिगर कर सकते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि किन लोगों को पटाखों से दूर रहना चाहिए।

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Diwali 2025 These people should stay away from firecrackers otherwise they may trigger illness
पटाखे - फोटो : Freepik

Diseases Caused By Firecrackers: दिवाली खुशियों का त्योहार है, लेकिन पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज कुछ खास स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। पटाखों में हानिकारक रसायन और भारी धातुएं होती हैं, जो जलने पर हवा में जहरीले कण छोड़ते हैं। इसके साथ ही तेज शोर सीधे तंत्रिका तंत्र और कानों को प्रभावित करता है।



इन दोनों कारणों के संपर्क में आने से कई पुरानी बीमारियां तुरंत ट्रिगर हो सकती हैं, जिससे त्योहार के माहौल में ही व्यक्ति को अस्पताल जाना पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम सब त्योहार मनाएं, लेकिन खुद की सुरक्षा को पहले प्राथमिकता दें।

जिन लोगों को पहले से ही श्वसन, हृदय या सुनने से संबंधी समस्याएं हैं, उनके लिए पटाखों के पास रहना किसी बड़े जोखिम को निमंत्रण देने जैसा है। इसलिए इन लोगों को पटाखों से पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए और जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। आइए इस लेख जानते हैं जिन लोगों को ये बीमारियां हैं उन्हें पटाखों से खास तौर पर क्यों दूर रहना चाहिए।

Diwali 2025 These people should stay away from firecrackers otherwise they may trigger illness
सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock

अस्थमा और श्वसन रोगियों के लिए खतरा
अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के मरीजों को पटाखों से सबसे ज्यादा खतरा होता है। पटाखों के धुएं में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और बारीक कण फेफड़ों में घुसकर सूजन पैदा कर सकते हैं।

इससे उनकी सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर तकलीफ और अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। इन लोगों को इस दौरान घर के अंदर ही रहना चाहिए और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए।


ये भी पढ़ें- Health Tips: क्या पटाखे माईग्रेन को ट्रिगर कर सकते है? इस दिवाली जरूर बरतें ये सावधानियां
 
Diwali 2025 These people should stay away from firecrackers otherwise they may trigger illness
सिरदर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
साइनस, माइग्रेन और एलर्जी से पीड़ित लोग
जिन लोगों को साइनस, माइग्रेन या एलर्जी की शिकायत रहती है, उनके लिए पटाखों का धुआं एक बड़ा ट्रिगर हो सकता है। धुएं में मौजूद रसायन नाक के मार्ग और साइनस कैविटी में जलन पैदा करते हैं। इससे साइनस ट्रिगर हो सकता है, जिससे नाक बहना, लगातार छींक आना, सिरदर्द और चेहरे पर दबाव महसूस हो सकता है। ऐसे लोगों को अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों से पूरी तरह बचना चाहिए।

ये भी पढ़ें- Diwali 2025: दिवाली में जरूर बरतें ये सावधानियां वरना बहरे हो सकते हैं आप, जरूर जानें
 
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कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com
संवेदनशील कान वाले लोग
पटाखों की तेज आवाज कानों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। बच्चों और बुजुर्गों के कान ज्यादा संवेदनशील होते हैं। 140 डेसिबल से अधिक की आवाज उनके अंदरूनी कान की कोशिकाओं को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है, जिससे टिनिटस (कान में घंटी बजना) या बहरापन हो सकता है।

इसके अलावा जिन लोगों पहले सी ही सुनने से संबंधित समस्या है उन्हें भी पटाखों से दूर रहना चाहिए। इन लोगों को हमेशा इयरप्लग्स पहनने चाहिए या तेज शोर वाले इलाकों से दूर रहना चाहिए।
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हार्ट - फोटो : Adobe Stock Images
हार्ट के मरीज और हाई ब्लड प्रशर
हृदय रोगियों और हाई ब्लड प्रशर वाले लोगों को भी पटाखों से दूर रहना चाहिए। पटाखों की तेज और अचानक आवाज से तनाव हार्मोन जैसे एड्रेनालाईन का स्तर तेजी से बढ़ा सकती हैं। यह अचानक बढ़ा हुआ तनाव ब्लड प्रशर को बढ़ा सकता है और दिल की धड़कन को तेज कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी पटाखों के धुओं से दूर रहना चाहिए।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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