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Health Tips: हार्मोन कैसे हमारे सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं? जानें इसके पीछे का साइंस

Sun, 19 Oct 2025 08:25 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 19 Oct 2025 08:25 PM IST
सार

  • हार्मोन हमारे दिमाग को कंट्रोल करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है।
  • हमारे शरीर में कई तरह के हार्मोन अलग अलग परिस्थितियों में रिलीज होते हैं।
  • आइए इस लेख में जानते हैं कि हार्मोन कैसे हमारे सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।

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हार्मोन का दिमाग पर असर - फोटो : Adobe Stock

Hormones and Decision-Making: हमें अक्सर सिखाया जाता है कि हम सिर्फ तर्क और बुद्धिमत्ता के आधार पर निर्णय लेते हैं, लेकिन विज्ञान बताता है कि हमारे सोचने, महसूस करने और निर्णय लेने की क्षमता पर हमारे हार्मोन की भी बड़ी भूमिका होती है। हार्मोन ब्लड फ्लो के माध्यम से हमारे शरीर में घूमते हैं और दिमाग सहित विभिन्न अंगों को संदेश भेजते हैं।



हमारा मस्तिष्क, विशेष रूप से लिम्बिक सिस्टम जो भावनाओं को नियंत्रित करता है, हार्मोन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। यही कारण है कि तनाव में लिया गया कोई भी निर्णय शांत अवस्था में लिए गए निर्णय से पूरी तरह अलग होता है। कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन), टेस्टोस्टेरोन, और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन हमारे मूड, जोखिम लेने की क्षमता, स्मृति और यहां तक कि सामाजिक व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं।

इन हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव हमारे सोचने के तरीके को बदल देता है, जिससे हम कभी आवेगी तो कभी बहुत सतर्क हो जाते हैं। इन संकेतों को समझना और हार्मोनल संतुलन बनाए रखना, बेहतर निर्णय लेने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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तनाव, स्ट्रेस - फोटो : Freepik.com

कोर्टिसोल: तनाव और आपातकालीन निर्णय
जब हम तनाव में होते हैं, तो कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। कोर्टिसोल दिमाग के उस हिस्से (प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स) को प्रभावित करता है जो तार्किक निर्णय लेता है। उच्च कोर्टिसोल के कारण, हम अक्सर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में आ जाते हैं और जल्दबाजी या आवेगी निर्णय लेते हैं। यह स्थिति हमें दूरगामी परिणामों पर विचार करने से रोकती है।

अगर लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल शरीर में बन रहा है तो इसका नाकारात्मक प्रभाव हमारी स्मृति और एकाग्रता पर पड़ता है।

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रिवार्ड हार्मोन - फोटो : Adobe stock
डोपामिन: जोखिम और रिवार्ड
डोपामिन को 'रिवार्ड हार्मोन' कहा जाता है। जब इसका स्तर बढ़ता है, तो यह हमें जोखिम लेने और नए अनुभवों की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है। डोपामिन का उच्च स्तर व्यक्ति को अधिक आत्मविश्वासी बनाता है और वह भविष्य के संभावित लाभों के लिए तात्कालिक जोखिमों को नजरअंदाज कर सकता है। यह हार्मोन हमें प्रेरणा भी देता है।

 
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ब्रेन - फोटो : Freepik.com

एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन का प्रभाव
एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन निर्णय लेने की शैली को अलग तरह से प्रभावित करते हैं। एस्ट्रोजन महिलाओं में भावनाओं और सामाजिक संकेतों को समझने की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे वे अक्सर सहयोगात्मक और सावधानीपूर्ण निर्णय लेती हैं। वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर ज्यादा होने पर प्रतिस्पर्धात्मक और आक्रामक निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।


 
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relationship tips - फोटो : Adobe stock
ऑक्सीटोसिन का प्रभाव
ऑक्सीटोसिन को लोग प्यार का हार्मोन ('लव हार्मोन') भी कहते हैं। यह हमारे सामाजिक व्यवहार और सोचने के तरीके को सीधे तौर पर नियंत्रित करता है। यह हार्मोन हमें दूसरों के प्रति भरोसा और सहानुभूति महसूस करने में मदद करता है।

जब हमारे शरीर में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ता है, तो हम दूसरों पर ज्यादा विश्वास करने लगते हैं और ऐसे निर्णय लेते हैं जो सामाजिक रूप से सही हों। यही वजह है कि ऑक्सीटोसिन टीमवर्क और आपसी सहयोग को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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