वजन कम करने के लिए आजकल लोग तरह-तरह के तरीके आजमा रहे हैं। इनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग भी काफी लोकप्रिय है। इसमें खाने के समय को सीमित किया जाता है और दिन के कुछ घंटों में ही भोजन किया जाता है। माना जाता रहा है कि इससे वजन घटाने में मदद मिलती है। इतनी ही नहीं, कुछ अध्ययनों में इससे ब्लड प्रेशर और आराम की स्थिति में दिल की धड़कन कम होने जैसे फायदे भी सामने आए हैं। लेकिन क्या वास्तव में इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सही है?
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इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने में मदद कर सकती है लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। डायबिटीज, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं या नियमित दवाइयां लेने वालों को डॉक्टर की सलाह जरूरी लेनी चाहिए।
इंटरमिटेंट फास्टिंग से क्या फायदे हो सकते हैं?
इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल वजन कम करने के लिए किया जाता है। जब खाने का समय सीमित होता है तो आपके दिन की टोटल कैलोरी कम हो सकती है, जिससे वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
- कुछ शोध में यह भी पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से ब्लड प्रेशर और आराम की स्थिति में दिल की धड़कन को कम करने में मदद मिल सकती है।
- एक अध्ययन में 16 घंटे के उपवास वाले पुरुषों में फैट कम होने के संकेत मिले थे। हालांकि, ऐसे परिणाम जानवरों पर हुए अध्ययनों में भी देखे गए हैं, इसलिए इन्हें हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
- यानी इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की उम्र, खान-पान, वजन और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
लंबे समय तक खाली पेट रहने से हो सकता है सिरदर्द
इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। इसकी एक वजह लंबे समय तक खाना न खाना हो माना जाता है। जब शरीर को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता तो कुछ लोगों में सिरदर्द या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- 2020 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोगों में सिरदर्द की समस्या सामने आई थी। हालांकि हर व्यक्ति में इसकी गंभीरता एक जैसी नहीं होती। किसी को हल्का सिरदर्द हो सकता है तो किसी में परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।
- अगर फास्टिंग के दौरान बार-बार सिरदर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डायबिटीज है तो बिना सलाह के फास्टिंग न करें
डायबिटीज वाले लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग थोड़ी जटिल हो सकती है। लंबे समय तक खाना न खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। खासकर जो लोग ब्लड शुगर कम करने वाली दवाइयां या इंसुलिन लेते हैं, उनमें हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए डायबिटीज के मरीजों को सिर्फ वजन कम करने के लिए अपने मन से फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। पहले अपने डॉक्टर से बात करके यह समझना चाहिए कि आपके लिए खाने का कौन सा पैटर्न सुरक्षित है?
दवाइयां लेते हैं तो भी सावधानी जरूरी
अगर आप ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी दूसरी बीमारी की नियमित दवा लेते हैं, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
- फास्टिंग के दौरान खाने का समय बदलने से कुछ दवाइयों को लेने का समय भी बदल सकता है। लंबे समय तक भोजन न लेने से कमजोरी, चक्कर या दूसरी परेशानी हो सकती है। कुछ दवाइयां भोजन के साथ लेने की जरूरत भी होती है।
- इसलिए अगर आपको कोई बीमारी है या रोजाना दवा लेनी पड़ती है, तो खुद से इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें। वजन कम करना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित तरीके से करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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