राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई हिस्सों में इन दिनों संक्रामक बीमारियों का खतरा देखा जा रहा है। स्वाइन फ्लू (एच1एन1) वायरस का संक्रमण लोगों के लिए सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। इसके अलावा हर साल अगस्त से लेकर अक्तूबर के दिनों में डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का दबाव भी बढ़ जाता है। इन सभी बीमारियों में बुखार होना सबसे आम लक्षण है।
सेहत की बात: क्या आपको भी हो रहा है तेज बुखार? जानिए पहले 24 घंटे में क्या सावधानियां बरतें
मॉनसून में बुखार को सामान्य वायरल मानकर छोड़ना सही नहीं है।डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण भी मिलते-जुलते हो सकते हैं। पहले 24 घंटे में शरीर के तापमान और लक्षणों पर नजर रखें, पर्याप्त तरल लें और डॉक्टर से सलाह लें।
बुखार के हो सकते हैं कई कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू-मलेरिया हो या फिर स्वाइन फ्लू या सामान्य मौसमी बुखार, शुरुआत में सभी के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं।
- बुखार कब शुरू हुआ और शरीर का तापमान कितना है? इसपर सबसे ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।
- आपका बुखार बढ़ तो नहीं रहा और साथ में कौन से लक्षण हैं, इन बातों को भी नोट करें।
- सिरदर्द-शरीर में दर्द, उल्टी-दस्त, खांसी, गले में दर्द, ठंड लगने या आंखों के पीछे दर्द जैसे लक्षण हों और अगर ये लगातार बढ़ते जाएं तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
शुरुआती बुखार में पानी और तरल पदार्थ जरूरी
बुखार के कारण शरीर से पानी कम होने लगती है, इसलिए अगर आपको बुखार हो रहा है तो पर्याप्त तरल जरूर लेते रहें। पानी, ओआरएस या फलों का जूस न सिर्फ शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाते हैं बल्कि बीमारियों के जटिलताओं को कम करने में भी मदद करते हैं। खूब पानी पीते रहना शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
संक्रमण के कारण होने वाले बुखार की स्थिति में पानी की कमी की दिक्कत सबसे ज्यादा देखी जाती है, ये जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
- डॉक्टर कहते हैं, बुखार और इससे जुड़ी दिक्कतों को कम करने के लिए पैरासिटामोल लिया जा सकता है।
- हालांकि अगर 24-48 घंटे के बीच पैरासिटामोल लेने के बाद भी बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा या फिर बार-बार बुखार वापस आ जाता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
- डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं खुद से न लें, क्योंकि ये रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- बुखार होने पर एंटीबायोटिक दवाएं खुद से शुरू न करें। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक काम नहीं करती।
क्या सावधानियां जरूरी?
मॉनसून में हर बुखार को डेंगू या मलेरिया भी नहीं मानना चाहिए और हर बुखार को सामान्य वायरल मानना भी मुश्किलें बढ़ा सकता है। इसलिए बुखार के साथ होने वाली अन्य समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
- अगर बुखार के साथ लगातार उल्टी, पेट में दर्द, खून आने, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
- बुखार कम हो जाना हमेशा बीमारी खत्म होने का संकेत नहीं होता। खासकर डेंगू में मरीज की हालत बीमारी के अलग-अलग चरणों में बदल सकती है। इसलिए तापमान कम होने के बाद भी लापरवाही न बरतें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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