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Diwali 2025: दिवाली में जरूर बरतें ये सावधानियां वरना बहरे हो सकते हैं आप, जरूर जानें

Sat, 18 Oct 2025 08:05 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sat, 18 Oct 2025 08:05 PM IST
सार

Risk of Hearing Loss on Diwali: कान हमारे शरीर के संवेदनशील अंगों में से एक है। दिवाली में पटाखों की वजह से अक्सर लोगों को कान से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि पटाखे फोड़ते समय क्या सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए?

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loud sound of firecrackers can affect the ears increasing the risk of deafness know in hindi
पठाखों की तेज आवाज का कानों पर क्या प्रभाव डालता है? - फोटो : Amar Ujala

Risk of Hearing Loss on Diwali: दिवाली का त्योहार रोशनी और उल्लास का पर्व है, लेकिन इसके साथ ही पटाखों की तेज और कर्कश आवाज एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा भी पैदा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों की अचानक और अत्यधिक तेज ध्वनि हमारे कानों की सुनने की क्षमता को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे बहरापन का जोखिम बढ़ जाता है।



कान हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंगों में से एक है, और पटाखों का तेज आवाज सीधे अंदरूनी कान की नाजुक कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करती है। इस तरह के नुकसान को शोर-प्रेरित सुनवाई हानि नॉइज इंड्यूज्ड हियरिंग लास (एनआईएचएल) कहा जाता है। दिवाली के दौरान कुछ पटाखों से निकलने वाली आवाज 140 डेसिबल या उससे भी अधिक हो सकती है, जबकि 85 डेसिबल से अधिक की कोई भी ध्वनि लंबे समय तक सुनना कानों के लिए नुकसानदायक होता है।

यह जोखिम खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा होता है। इसलिए त्योहारों का मजा लेते हुए, कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि पटाखों की तेज आवाज हमारे कानों को कैसे प्रभावित कर सकती है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।

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delhi diwali fire crackers - फोटो : Adobe Stock
कान को अंदर से प्रभावित करती है
तेज आवाज सीधे हमारे अंदरूनी कान में मौजूद कॉक्लिया को प्रभावित करती है। कॉक्लिया में बाल जैसी बहुत छोटी और नाजुक संवेदनशील कोशिकाएं होती हैं। ये कोशिकाएं ध्वनि तरंगों को तंत्रिका संकेतों में बदलकर दिमाग तक भेजती हैं। पटाखों की तेज आवाज इन कोशिकाओं को अत्यधिक कंपन के कारण स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है। एक बार नष्ट होने पर, ये कोशिकाएं दोबारा उत्पन्न नहीं होतीं, और यही स्थायी बहरेपन का कारण बन सकता है।

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कान - फोटो : Adobe Stock Images
टिनिटस की समस्या
पटाखों के अत्यधिक शोर के कारण होने वाला सबसे आम शुरुआती लक्षण टिनिटस है। टिनिटस में मरीज को कान में लगातार घंटी बजने, भिनभिनाहट या सनसनाहट जैसी आवाज महसूस होती है। यह आवाज अक्सर अस्थायी होती है, लेकिन लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से यह स्थायी हो सकती है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाएं तनाव में हैं या उन्हें नुकसान पहुंच चुका है।

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युवाओं में बढ़ती बहरेपन की समस्या - फोटो : Adobe stock photos

बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा
बच्चों के कान की संरचना अभी विकसित हो रही होती है, इसलिए वे वयस्कों की तुलना में तेज आवाज के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। बुजुर्गों में पहले से ही उम्र के कारण सुनने की क्षमता कमजोर हो चुकी होती है, ऐसे में तेज आवाज उनकी मौजूदा समस्या को और भी बदतर बना सकती है। पटाखों के फटने की आवाज कानों में दर्द और दबाव भी पैदा कर सकती है।

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डॉक्टर - फोटो : Freepik
बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
दिवाली पर कानों को सुरक्षित रखने के लिए इयरप्लग्स या नॉइज-कैंसिलेशन वाले हेडफोन का इस्तेमाल करें। पटाखों के फटने वाली जगह से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। बच्चों को पटाखों से दूर रखें और उन्हें कान को रुई या हाथ से ढकने के लिए कहें। अगर पटाखों की आवाज के बाद कानों में कोई दर्द या आवाज महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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