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Health Tips: क्या पटाखे माईग्रेन को ट्रिगर कर सकते है? इस दिवाली जरूर बरतें ये सावधानियां

Sun, 19 Oct 2025 11:32 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 19 Oct 2025 11:32 AM IST
सार

अक्सर ऐसा होता है कि लोग बहुत दिनों से दिवाली मनाने की प्लानिंग करते हैं लेकिन उसी दिन उनका असहनीय सिरदर्द होने लगता है। ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकता है, उनमें से एक बड़ा कारण है पटाखों की आवाज और उसका धुआं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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सिरदर्द की समस्या - फोटो : Freepik

Diwali Health Tips: दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन अक्सर पटाखों की तेज आवाज और उनसे निकलने वाला धुआं कुछ लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखे माइग्रेन को सीधे तौर पर ट्रिगर कर सकते हैं। ऐसे में जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या है, उन्हें दिवाली में कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।



माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें सिर के एक या दोनों तरफ तेज धड़कन वाला दर्द होता है, जिसके साथ अक्सर उल्टी, मतली और पटाखे की रोशनी और तेज आवाज के प्रति अत्यधिक सेंसिटिविटी महसूस होती है। पटाखे की वजह से शोर और धुआं दोनों होता है, और ये दोनों चीजें माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं।

कुछ लोगों के लिए ये दर्द असहनीय हो सकते हैं। तेज और अचानक होने वाला शोर दिमाग में तनाव पैदा करता है, जबकि धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन माइग्रेन का दौरा शुरू कर सकते हैं। इसलिए त्योहारों के इस माहौल में अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि पटाखों से माइग्रेन कैसे ट्रिगर होता है और इस दिवाली पर आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

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तेज आवाज वाले पटाखों से भी दूर रहें - फोटो : Adobe Stock

तेज आवाज वाली जगहों से दूर रहें
पटाखों की तेज आवाज माइग्रेन का एक बड़ा ट्रिगर है। जब मस्तिष्क को अचानक तेज शोर का सामना करना पड़ता है, तो यह तनाव और ओवरलोड की स्थिति में आ जाता है। इससे मस्तिष्क में रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और न्यूरोकेमिकल परिवर्तन होते हैं, जो तुरंत माइग्रेन का दौरा शुरू कर सकते हैं। तेज शोर से बचने के लिए माइग्रेन के मरीजों को शोरगुल वाली जगहों से दूर रहना चाहिए या इयरप्लग्स का इस्तेमाल करना चाहिए।


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पटाखों के धुएं से परहेज करें - फोटो : Adobe Stock

धुआं और खराब हवा की गुणवत्ता
पटाखों से निकलने वाला धुआं और धूल हवा की गुणवत्ता को बहुत खराब कर देते हैं। इस धुएं में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक कण होते हैं। ये रसायन फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करने के साथ-साथ माइग्रेन के दौरे को भी ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए माइग्रेन के मरीजों को धुएं वाले क्षेत्रों से बचना चाहिए और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए।


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स्लीप साइकिल पूरा करें - फोटो : adobe stock

रोशनी और स्लीप साइकिल
दिवाली पर तेज और चमकदार, जगमगाती रोशनी भी माइग्रेन का कारण बन सकती है। फ्लैशिंग या तेज रोशनी, जिसे फोटोफोबिया कहते हैं, से मस्तिष्क की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। साथ ही त्योहार की वजह से देर तक जागना और नींद के पैटर्न में बदलाव आना भी माइग्रेन के दौरे की आवृत्ति को बढ़ा सकता है।

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धुओं के बचने के लिए मास्क पहनें - फोटो : Freepik.com
माइग्रेन से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
माइग्रेन से बचने के लिए, इस दिवाली कुछ आदतें अपनाएं, जैसे- तेज आवाज वाले पटाखों से दूर रहें। मास्क पहनें ताकि धुएं के कण फेफड़ों में कम जाएं। हाइड्रेटेड रहें और त्योहारों के दौरान भी अपनी नींद का निश्चित समय बनाए रखें। अगर दर्द शुरू हो, तो तुरंत एक शांत, अंधेरे कमरे में आराम करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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