राजधानी दिल्ली-एनसीआर में मच्छरजनित रोगों के जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस महीने की 15 तारीख तक 27 लोगों में डेंगू के संक्रमण की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि इस पूरे साल में अब तक डेंगू के कुछ 163 केस दर्ज किए गए हैं।
Dengue In Delhi: छह साल बाद दिल्ली में डेंगू ने तोड़ा ये रिकॉर्ड, डॉक्टरों की चेतावनी- बिगड़ सकते हैं हालात
छह साल में पहली बार जुलाई तक सबसे अधिक मामले
एमसीडी की रिपोर्ट से पता चलता है कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों की संख्या पिछले दो सप्ताह पहले की तुलना में 8,889 से बढ़कर इस सप्ताह 12,495 हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेंगू के मामलों का मौजूदा स्तर पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक है। पिछले वर्षों की इसी अवधि में दिल्ली में 2022 में 158 मामले, 2021 में 40 मामले, 2020 में 28 मामले, 2019 में 32 मामले और 2018 में 43 मामले दर्ज किए गए थे।
बाढ़ के कारण बिगड़ सकते हैं हालात
अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित इंटरनेल मेडिसिन के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, बाढ़ और जलजमाव ने मच्छरजनित कई बीमारियों जैसे डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा बढ़ा दिया है। राजधानी के कई हिस्सों में भारी जलजमाव की स्थिति है जो मच्छरों के प्रजनन और बढ़ने के लिहाज से काफी उपयुक्त हो सकती है। ऐसे में आशंका है कि आने वाले महीनों में डेंगू के मामले बढ़ सकते हैं। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि सभी लोग मच्छरों के काटने से बचाव करें।
हल्के लक्षण घर पर ही हो जाते हैं ठीक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू के कई मामले जिनमें संक्रमण के लक्षण काफी हल्के होते हैं, वह सामान्य उपचार से ठीक किए जा सकते हैं। बुखार और फ्लू जैसे सामान्य लक्षणों में पेरासिटामोल के साथ रोगी को भरपूर आराम और अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इन सामान्य उपायों से ज्यादातर रोगी ठीक हो सकते हैं।
हालांकि अगर लक्षण गंभीर हैं, रक्तस्रावी बुखार की समस्या है या फिर प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं तो अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है।
कैसे करें डेंगू की पहचान?
डॉक्टर बताते हैं, डेंगू की पुष्टि के लिए खून की जांच की जाती है। हालांकि कुछ लक्षण जैसे तेज बुखार, सिरदर्द-शरीर में दर्द, मतली और त्वचा पर दाने या चकत्ते होना डेंगू का संकेत हो सकता है। गंभीर मामलों में रोगी को रक्तस्राव की समस्या जैसे उल्टी या शौच से खून खाने, प्लेटलेट्स काफी तेजी से कम होने की भी दिक्कत होने लगती है। अधिकांश रोगी 1-2 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। कुछ राज्यों में डेंगू के टाइप-2 मामले भी देखे जा रहे हैं जो गंभीर रोगकारक हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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