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आंखें शरीर के उन नाजुक अंगों में से एक हैं जिन्हें विशेष सुरक्षा और देखभाल की आवश्यकता होती है, पर क्या इस अति संवेदनशील अंग की सेहत को लेकर वास्तव में हम सभी अलर्ट हैं? यह सवाल इसलिए लाजमी है क्योंकि आंखों में होने वाली सामान्य परेशानियों को हम सभी बहुत हल्के में लेते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी इस तरह की लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषतौर पर आंखों में होने वाले संक्रमण को नजरअंदाज करना, या फिर खुद से ही इसके लिए दवाइयां लेना जानलेवा हो सकता है। आपको भी निश्चित ही आंखों की परेशानियों का जानलेवा एंगल सुनकर अचरज हो रहा होगा, पर वास्तविकता ऐसी ही है।
अध्ययनों से पता चलता है कि गर्मियों में आंखों में संक्रमण होना काफी आम बात है, पर कुछ तरह के संक्रमण जानलेवा भी हो सकते हैं। यही कारण है कि सभी लोगों को आंखों की सेहत को लेकर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या को लेकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, इसमें होने वाली लापरवाही आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बन सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आंखों में होने वाले किस तरह के संक्रमण की समस्या को जानलेवा माना जाता है?
Deadly eye infections: जानलेवा हो सकती है आंखों में संक्रमण की समस्या, ऐसे लक्षणों के दिखते ही तुरंत हो जाएं सावधान
म्यूकोरमाइकोसिस
कोरोना के इस दौर में म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस संक्रमण) के मामले काफी चर्चा में रहे। यह एक फंगल इंफेक्शन है, जो ग्लोमेरोमाइकोटा फ़ाइलम से संबंधित सूक्ष्मजीवों के कारण होता है। यह फंगस हमारे वातावरण में हमेशा मौजूद रहता है, हालांकि इससे मुकाबले के लिए शरीर में प्राकृतिक प्रतिरक्षा होती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, विशेषकर डायबिटीज रोगी या अधिक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करने वालों में इस संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। यह संक्रमण नाक से होते हुए रक्त वाहिकाओं पर आक्रमण करता है और साइनस से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। संक्रमितों को एक तरफ के चेहरे में सूजन, नाक, आंख के पास काले धब्बे दिख सकते हैं, ऐसे लक्षणों में तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है। इलाज के अभाव में रोगी की जान जा सकती है।
एस्परगिलोसिस
ब्लैक फंगस की ही तरह एस्परगिलोसिस भी बेहद घातक आंखों के संक्रमण में से एक है। एस्परगिलस फंगस के कारण यह संक्रमण होता है। हम में से ज्यादातर लोगों के शरीर में सांस के माध्यम से यह फंगस पहुंचता है, पर इससे कोई क्षति नहीं होती। मोल्ड स्पोर्स में सांस लेने या कटे या खुले घाव के माध्यम से भी यह शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अस्थमा या सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्तियों में इसका खतरा अधिक होता है। एस्परगिलस ओकुलर इन्फेक्शन से प्रभावित मरीजों को दर्द, जलन, हाइपरमिया और धुंधली दृष्टि की समस्या हो सकती है। समय से इलाज न मिलने के कारण यह जानलेवा भी हो सकता है।
ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस
ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस, आंख के आसपास की चर्बी और मांसपेशियों में होने वाला संक्रमण है। यह पलकों, भौहों और गालों को प्रभावित करता है। यह अचानक शुरू हो सकता है या किसी संक्रमण का परिणाम भी हो सकता है। संक्रमितों को आंख में या उसके आसपास दर्द और सूजन, आंख को इधर-उधर करने में दर्द और दोहरी दृष्टि जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इलाज की कमी के कारण इससे संक्रमित 5-25 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है।
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में डॉ पूजा अंगादी (वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ, शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स) बताती हैं, आंखों की सेहत के लेकर की जाने वाली लापरवाही गंभीर समस्याओं यहां तक कि कुछ संक्रमण मौत का भी कारण बन सकते हैं। किसी भी तरह की परेशानी में खुद से दवाइयां या आई ड्रॉप्स लेने से बचें, इससे रोग बढ़ सकता है। आंखों में लालिमा, खुजली या लगातार बने रहने वाले दर्द के सही कारणों का निदान और उसके आधार पर इलाज आवश्यक होता है। आंखों की सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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