कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन इन दिनों चिंता का विषय बन गया है। ओमिक्रॉन के भारत में मामले 200 से ज्यादा हो चुके हैं। अभी तक जो साक्ष्य मिले हैं उनके मुताबिक ओमिक्रॉन के अधिक संक्रामक होने के बात सामने आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक्सपर्ट्स ने ओमिक्रॉन को लेकर चेतावनी जारी की है, वहीं कई जानकारी भी दी हैं। इसके तहत डब्ल्यू एच ओ की साउथ ईस्ट एशिया की निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने कहा कि ओमिक्रॉन के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं, मात्र वही स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए भारी मांग खड़ी कर सकते हैं। इसके साथ ही मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हो सकती हैं। बीमारी की गंभीरती की बात तो बाद की है। ऐसे में भारत ने 120 करोड़ वैक्सीन डोज पूरे कर लिए हैं, तो सवाल है कि जिन लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज ले लिए हैं क्या वह ओमिक्रॉन से सुरक्षित हैं? या मौजूदा कोरोना वैक्सीन ओमिक्रॉन पर कितना काम करेगी?
Omicron Variant: ओमिक्रॉन संक्रमण पर मौजूदा कोरोना वैक्सीन असरदार है या नहीं? जानिए एक्सपर्ट के जवाब
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मौजूदा वैक्सीन ओमिक्रॉन पर कितना असरदार
डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक (साउथ ईस्ट एशिया) डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने बताया कि ओमिक्रॉन पर कई अध्ययन चल रहे हैं। ओमिक्रॉन में कई म्यूटेशन को देखते हुए ये मान लेना सही होगा कि मौजूदा वैक्सीन गंभीर बीमार होने और मौत के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। इसलिए डॉक्टर पूनम ने गंभीर जोखिम वाली आबादी के साथ वयस्कों, स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों को टीकाकरण में प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
वैक्सीनेटेड भी आ रहे ओमिक्रॉन की चपेट में
ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें वैक्सीनेशन करवा चुके लोग भी ओमिक्रॉन से संक्रमित हो गए। इस बारे में डॉक्टर पूनम खेत्रपाल ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन संक्रमण होने की संभावना को कम करती है। हालांकि ये जरूरी नहीं कि वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह से रोक दें। ये तथ्य सभी वेरिएंट के लिए सही है।
ओमिक्रॉन पर क्या बूस्टर डोज की जरूरत
इन दिनों वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत के बारे में भी बहस चल रही है। डब्ल्यू एच ओ की क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि मध्यम और गंभीर रूप से इम्युनो कॉम्प्रोमाइज लोगों को खतरा अधिक है और ऐसे लोगों के लिए वैक्सीन की एक अतिरिक्त डोज दी जानी चाहिए।
नोट: ये खबर डब्ल्यू एच ओ की क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. पूनम खेत्रपाल के ओमिक्राॅन पर दी गई जानकारी पर तैयार की गई है।
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