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अध्ययन: डेल्टा से 70 गुना अधिक संक्रामक है ओमिक्रॉन वैरिएंट, जानिए फेफड़ों पर कैसा होता है इसका असर?

Wed, 22 Dec 2021 03:38 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Wed, 22 Dec 2021 03:38 PM IST
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Omicron variant infects and multiplies 70 times faster than Delta, says study
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा - फोटो : Pixabay

कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनियाभर के स्वास्थ्य संगठनों और वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। अब तक हुए अध्ययनों में वैज्ञानिक इस वैरिएंट को काफी संक्रामक मान रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई देशों में ओमिक्रॉन वैरिएंट ने दोबारा से लॉकडाउन जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचाव के लिए सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है, यह उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है जिनका पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है।



इस बीच ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामता और गंभीरता को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। अध्ययन के अनुसार, कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा और मूल कोविड-19 स्ट्रेन की तुलना में 70 गुना अधिक तेजी से संक्रमण फैला सकता है, हालांकि इससे बीमारी के गंभीर रूप लेने का खतरा काफी कम देखा गया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जानने की कोशिश की है कि यह नया वैरिएंट शरीर के किन अंगों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है, आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं। 

Omicron variant infects and multiplies 70 times faster than Delta, says study
बहुत संक्रामक है ओमिक्रॉन वैरिएंट - फोटो : iStock

बेहद संक्रामक है कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट
हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामता और गंभीरता को जानने के लिए अध्ययन किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि अध्ययन में इस वैरिएंट को अब तक के तमाम कोरोना वैरिएंट्स से कहीं अधिक संक्रामक पाया गया है। यह मनुष्यों के ब्रोन्कस में डेल्टा और अन्य वैरिएंट्स की तुलना में 70 गुना अधिक तेजी से अपने आप को बढ़ा सकता है। ब्रोन्कस, निचले श्वसन पथ में स्थित एक वायुमार्ग है जिससे फेफड़ों में हवा का संचालन होता है।

Omicron variant infects and multiplies 70 times faster than Delta, says study
फेफड़ों पर ओमिक्रॉन का असर - फोटो : iStock

ओमिक्रॉन वैरिएंट का फेफड़ों पर असर
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना के डेल्टा और अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट का असर फेफड़ों पर कम देखा गया है, यही कारण है कि इससे होने वाला संक्रमण ज्यादा गंभीर रूप नहीं ले रहा है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने श्वसन पथ के एक्स-विवो कल्चर को लेकर अध्ययन किया जिससे यह पता लगाया जा सके कि अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण और रोग की गंभीरता भिन्न क्यों है?

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Omicron variant infects and multiplies 70 times faster than Delta, says study
ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामता - फोटो : Pixabay

ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण की गंभीरता कम
हांगकांग विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर माइकल चैन ची-वाई और उनकी टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन में ओमिक्रॉन वैरिएंट को संक्रामक तो अधिक पाया गया लेकिन इसे बहुत खतरनाक नहीं माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमण के 24 घंटे बाद, ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा और मूल सार्स-सीओवी-2 वायरस की तुलना में लगभग 70 गुना अधिक तेजी से अपने आप को बढ़ाना शुरू कर देता है।  फिलहाल अच्छी बात यह है कि अन्य वैरिएंट्स की तुलना में मानव फेफड़े के ऊतकों को यह 10 गुना कम प्रभावित करता है, जिसके कारण बीमारी के गंभीर रूप लेने का जोखिम भी कम पाया गया है। 

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Omicron variant infects and multiplies 70 times faster than Delta, says study
कोरोना वायरस से बचाव बेहद जरूरी - फोटो : iStock

क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में प्रोफेसर माइकल चैन कहते हैं, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मनुष्यों में बीमारी की गंभीरता न केवल वायरस प्रतिकृति द्वारा निर्धारित की जाती है, बल्कि संक्रमण के लिए होस्ट इम्यून रिस्पॉस का ध्यान रखना भी आवश्यक है। इसके अलावा यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भले ही कोई वायरस स्वयं में कम रोगजनक हो लेकिन अधिक लोगों को संक्रमित करने से वह अधिक संक्रामक बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की गंभीरता भले ही कम है लेकिन इसका तेजी से बढ़ना गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसपर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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