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WHO: कोविड-19 के कारण लगभग दो साल घट गई है लोगों की औसत आयु, मोटापे सहित इन बीमारियों का भी बढ़ा खतरा

Sat, 25 May 2024 01:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 25 May 2024 01:07 PM IST
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COVID-19 eliminated global level of life expectancy Increasing obesity and malnutrition
कोरोना का खतरा - फोटो : istock

वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी को चार साल से अधिक का समय बीत गया है। इस दौरान कोरोना के वैरिएंट्स में कई बार म्यूटेशन हुआ और संक्रमितों में हल्के से लेकर गंभीर स्तर के लक्षण रिपोर्ट किए गए। कोरोना का खतरा अभी भी थमा नहीं है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस में एक बार फिर से म्यूटेशन हुआ है, जिससे उत्पन्न नया सब-वैरिएंट कई देशों में संक्रमण बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है। सिंगापुर की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां पर दो सप्ताह में ही कोरोना के मामलों में 90 फीसदी से अधिक की वृद्धि रिपोर्ट की गई है।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञों ने सभी लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर लगातार सावधानी बरतते रहने की अपील की है। कोरोना के जोखिमों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बड़ी जानकारी  भी साझा की है। रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने कहा कोविड-19 के कारण वैश्विक जीवन प्रत्याशा में लगभग दो साल की कमी आ गई है। जीवन प्रत्याशा या लाइफ एक्सपेक्टेंसी उन अतिरिक्त वर्षों की औसत संख्या का अनुमान है जो एक निश्चित आयु का व्यक्ति जीने की उम्मीद कर सकता है।

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कोरोना संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : istock

घट गई है लाइफ एक्सपेक्टेंसी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा, पिछले एक दशक में लाइफ एक्सपेक्टेंसी में बेहतर सुधार देखा जा रहा था। हालांकि कोविड-19 के कारण इसमें गिरावट आ गई है। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कोविड-19 महामारी ने संपूर्ण स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, संक्रमण के कारण लोगों में कई प्रकार की बीमारियां भी विकसित होती देखी गई हैं। इन परिस्थितियों ने लाइफ एक्सपेक्टेंसी को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

कोविड-19 के कारण वैश्विक जीवन प्रत्याशा 1.8 वर्ष गिरकर अब 71.4 वर्ष रह गई है। साल 2012 में भी जीवन प्रत्याशा इसी के आसपास थी।

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टेड्रोस एडनोम घेबियस - फोटो : ANI

कोविड-19 का संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछली आधी सदी में किसी भी अन्य घटना की तुलना में कोविड-19 ने संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा पर सबसे गहरा प्रभाव डाला है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कहा कि ये आंकड़े वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। 

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock

कोविड-19 और मौत

स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कोविड के शुरुआती दौर में ही साल 2020-2021 के दौरान 15.9 मिलियन (1.59 करोड़) से अधिक लोगों की मौत हुई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा महामारी के दौरान कोविड-19 मृत्यु का प्रमुख कारण रहा है। 2020 में विश्व स्तर पर यह मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण और 2021 में दूसरा प्रमुख कारण रहा। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) जैसे कि इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक, कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया और मधुमेह के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई । 

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बच्चों में मोटापे की समस्या - फोटो : istock

अधिक वजन और कुपोषण का जोखिम

डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञों ने बताया, कोरोना ने सीधे तौर पर सेहत को गंभीर नुकसान तो पहुंचाया ही है साथ ही कोविड-19 के कारण उपजी परिस्थितियों ने दुनियाभर में कुपोषण के बोझ को भी बढ़ा दिया है। इसके अतिरिक्त साल 2022 में, पांच साल और उससे अधिक उम्र के एक अरब से अधिक लोग मोटापे के साथ जी रहे थे, जबकि आधे अरब से अधिक लोग कम वजन वाले थे।

बच्चों में कुपोषण भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जा रहा है। ये सभी स्थितियां संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ समय से पहले मृत्यु के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।



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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 eliminated a decade of progress in global level of life expectancy


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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