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अब कंप्यूटर के जरिए पता चल सकेंगे कैंसर के लक्षण

Tue, 13 Aug 2019 11:59 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Tue, 13 Aug 2019 11:59 AM IST
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computer can detect diagnose breast cancer better than doctors

कैंसर एक भयानक बीमारी के रूप में उभरी है। इसकी वजह है इसके लिए जिम्मेदार कारकों का सही समय पर पता न चलना, क्योंकि बहुत बार इस बीमारी का सही समय पर पता नहीं चलता है और व्यक्ति को इलाज मिलने में देरी हो जाती है। लेकिन अब अमेरिका में एक ऐसे कम्प्यूटर को बनाया गया है जो इंसान से ज्यादा बेहतर तरीके से कैंसर के लक्षणों का पता लगाएगा। तो आइए जाने कैसे काम करता है ये कम्प्यूटर।

computer can detect diagnose breast cancer better than doctors

नई शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि कम्प्यूटर, कैंसर के कुछ प्रकार और स्तन कैंसर के पहले होने वाले घावों का पता डाक्टरों से ज्यादा बेहतरीन तरीके से लगा सकता है।कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिलिस के शोधकर्ताओं ने आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस को 240 बायोप्सी चित्रों के जरिए प्रशिक्षण दिया और इसे 87 पैथालाजिस्ट से परीक्षण करवाया। मशीन ने स्तन के सभी बायोप्सी की खोज और वर्गीकरण डॉक्टरों की ही तरह कम या ज्यादा तरीके से की। हालांकि एक अंतर बताने में वह सफल था वो ये कि डीसीआईेएस कैंसर का एक प्रकार और एटिपिकल हाईपरप्लासिया, एक प्रकार का गंभीर घाव जो काफी हद तक कैंसर जैसा होता है, लेकिन ये कैंसर नही होता है और इसे उस स्तर के उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।

computer can detect diagnose breast cancer better than doctors

जामा नेटवर्क ओपेन जर्नल में प्रकाशित शोध के मुख्य लेखक जॉन एल्मोर ने के मुताबिक स्तन बायोप्सी के मेडिकल चित्रों में बहुत से क्लिष्ट डाटा होते हैं जिनकी व्याख्या अलग-अलग तरीके से लोग करते हैं। स्तन एटिपिया और डीसीआईएस के बीच अंतर का पता लगाना बहुत जरूरी होता है जो कि पैथालॉजी के डॉक्टरों के लिए बहुत कठिन होता है। बहुत बार डॉक्टर अपने ही किए हुए डायग्नोसिस पर भरोसा नहीं करते हैं जब उन्हें वहीं केस एक साल बाद देखने को मिलता है। डीसीआईएस और एटिपिकल हाइपरप्लासिया दोनों में ही पहला चरण समान होता है वो है इसके घाव को खत्म करना। लेकिन अगला चरण बिल्कुल ही अलग होता है।

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अगर लोगों में डीसीआईएस का पता चलता है तो इसमें लुम्पैक्टोमी की जरूरत होती है, जोकि रेडिएशन थेरेपी या हार्मोनल थेरेपी टेमोक्सीफेन के जरिए की जाती है। लेकिन अगर कैंसर तेजी से बढ़ रहा होता है तो स्तन को निकाल सकते हैं। एटिपिकल हाइपरप्लासिया, जोकि एक घाव होता है जो स्तन को प्रभावित करता है और स्तन कैंसर के खतरे की ओर इशारा करता है। डॉक्टर कई बार इसके लिए जिम्मेदार कोशिकाओं को निकालने की सलाह देते हैं।

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