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Health Alert: इन राज्यों में कालरा-डायरिया के मरीजों ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानिए आप कैसे रहें सुरक्षित

Sat, 14 Sep 2024 08:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 14 Sep 2024 08:03 PM IST
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cholera diarrhoea cases increasing in Maharashtra and goa know Cholera causes and prevention
अस्पताल - फोटो : freepik.com

सितंबर-अक्तूबर का महीना मच्छरजनित बीमारियों के जोखिमों को बढ़ा देता है। हर साल इन महीनों के दौरान डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ जाती है। इस साल भी कई राज्यों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक डेंगू के रोगी बढ़ने लगे हैं। मच्छरजनित रोगों के अलावा महाराष्ट्र और गोवा में बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों को बीमार देखा जा रहा है।



खबरों के मुताबिक गोवा में हैजा (कालरा) के कारण अस्पतालों में भीड़ देखी जा है। यहां 175 से अधिक मामले सामने आए हैं। इसी तरह से महाराष्ट्र में कालरा, पीलिया, डायरिया के मामले दोगुने हो गए हैं। ये बीमारियां मुख्य रूप से पाचन तंत्र से संबंधित होती है और दूषित पानी या भोजन से फैलती है। इससे गंभीर दस्त और निर्जलीकरण हो सकता है और अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों से सेहत को लेकर सतर्कता बरतते रहने की अपील की है। आइए इन बीमारियों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानते हैं।

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डायररिया के बढ़े मरीज - फोटो : istock

महाराष्ट्र-गोवा में बढ़े मरीज

महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि भारी बारिश के बीच इस साल पूरे राज्य में हैजा, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डायरिया के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। पिछले साल 2023 की तुलना में इस साल अगस्त के अंत तक इन मामलों में दोगुना से अधिक की वृद्धि रिपोर्ट की गई है। अगस्त के अंत तक इन रोगों के करीब 2,237 मामले सामने आए और 10 लोगों की मौत हो गई। पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,213 मामले और एक मौत दर्ज की गई थी।

इसी तरह गोवा स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य के कई अस्पतालों में जलजनित इन रोगों के शिकार लोगों की संख्या काफी बढ़ी है।

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डायरिया का खतरा - फोटो : istock

कालरा रोग के बारे में जानिए

कालरा, बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है जिसमें गंभीर दस्त और उल्टी की दिक्कत होती है। यह विब्रियो कोलेरा नामक जीवाणु से दूषित भोजन या पानी पीने से होता है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में या स्वच्छता की कमी के कारण कालरा का खतरा अधिक होता है।

कालरा गंभीर दस्त और निर्जलीकरण का कारण बनती है। निर्जलीकरण से आपके रक्त में खनिजों की तेजी से कमी होने लगती है जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन बढ़ जाता है। समय रहते इसके लक्षणों की पहचान और उपचार मिल जाए तो रोग की गंभीरता और जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

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उल्टी-मतली की समस्या - फोटो : istock

क्या हैं कालरा के लक्षण?

कालरा के अधिकांश मामलों में डायरिया या दस्त की समस्या होती है। इससे शरीर में तेजी से पानी की कमी होने लगती है। इसके साथ मतली और उल्टी की दिक्कत निर्जलीकरण का खतरा और भी बढ़ा देती है। पहले से ही किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के शिकार लोगों में ये लक्षण लो ब्लड प्रेशर और इससे शॉक लगने का कारण बन सकती है।

अगर किसी को कुछ घंटों से लगातार दस्त-उल्टी की दिक्कत बनी हुई है तो उसे तुरंत ओआरएस का घोल दें और डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

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स्वच्छ जल का करें सेवन - फोटो : istock

कालरा और डायरिया से बचाव के तरीके

कालरा और डायरिया से बचने के लिए स्वच्छ भोजन और पानी के सेवन के साथ हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। घरों के आसपास भी साफ-सफाई का ध्यान रखें। अपने हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं, शौच का उपयोग करने के बाद और खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। सिर्फ साफ जल का ही सेवन करें। बोतलबंद या पानी को उबालकर ठंडा करके पीना सबसे फायदेमंद है। बासी भोजन या बाहर खुले में रखी चीजों को बिल्कुल न खाएं।

इसके अलावा यदि किसी में कालरा या डायरिया के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें निर्जलीकरण से बचाने के लिए पानी, जूस, ओआरएस का घोल पिलाते रहें। इस बीमारी में समय पर उपचार बहुत जरूरी हो जाता है।


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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