इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारतीय रेलवे ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विश्व के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज के दोनों सिरों की आर्क को सोमवार को जोड़ दिया गया। इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने वाले रेल पुल को जोड़े जाने के मौके पर उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल मौजूद रहे। उन्होंने आर्क के आखिरी हिस्से को जोड़े जाने का निरीक्षण किया। वहीं रेल मंत्री पियूष गोयल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आर्क के दोनों हिस्सों को जुड़ते हुए देखा। बता दें कि यह देश में अब तक का सबसे बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट है।
इंजीनियरिंग का अजूबा: जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज के दोनों सिरे जुड़े
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उधमपुर-बारामुला रेल लिंक प्रोजेक्ट के तहत यह पुल जम्मू संभाग के रियासी में चिनाब नदी पर बना है। 1,315 मीटर की लंबाई वाले पुल में 467 मीटर का मेन आर्क स्पैन है, जो अब तक बनी किसी भी ब्रॉड गेज लाइन का सबसे लंबा आर्क स्पैन है। जल्द ही जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक सीधी रेल सेवा शुरू होगी। इससे न केवल यात्री ट्रेन, बल्कि सैनिकों की स्पेशल ट्रेनें भी तेज रफ्तार से दौड़ेंगी।
ऊपर वाले आर्क का काम पूरा होने के बाद अब रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू होगा। आजादी के बाद भारतीय रेलवे के इतिहास में यह पुल मील का पत्थर साबित होगा, जो विज्ञान और तकनीक का बेहतरीन नमूना पेश करेगा। इस प्रोजेक्ट में कुल 38 टनल हैं, जिसमें सबसे लंबी टनल की लंबाई 12.75 किलोमीटर है।
ब्रिज को बनाने के लिए खास तरह के दो केबल कार बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 20 और 37 मीट्रिक टन है। रेल अधिकारियों का कहना है कि 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी हवा चली तो यह पुल आसानी से टिका रहेगा।
बारामुला रेल लिंक पर चिनाब आर्क ब्रिज की लंबाई 467 मीटर है। नदी के तल से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है, जो एफिल टावर व कुतुबमीनार की ऊंचाई से अधिक है। इसमें 26 बड़े और 11 छोटे पुल हैं। 37 पुलों की कुल लंबाई 7 किमी है।