1965 की लड़ाई में भारतीय सेना के जवानों के हौसलों के आगे पाकिस्तान के सेना बौनी हो गयी थी। आलम ये था कि कश्मीर को हासिल करने का सपना देखने वाला पाकिस्तान खुद लाहौर और सियालकोट को खो देने की कगार पर आ गया था ।
अगर शास्त्री चाहते तो हिन्दुस्तान का हिस्सा होते लाहौर-सियालकोट, पर इस एक फैसले से नहीं हुआ ऐसा?
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 21 Feb 2017 05:28 PM IST
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