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Exclusive: गर्व से शहीद फयाज के पिता बोले 'फख्र है कि बेटा हिंदुस्तान के लिए शहीद हुआ'

Tue, 16 May 2017 12:05 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/कुलगाम
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/कुलगाम Updated Tue, 16 May 2017 12:05 AM IST
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Umar Fayaz father speaks with amar ujala
Umar Fayaz - फोटो : Amar Ujala
शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज आज घाटी समेत देश के कई युवाओं के रोल मॉडल बन चुके हैं। लेफ्टिनेंट के घर अमर उजाला टीम पहुंचीं तो पाया कि पूरा परिवार अभी तक सदमे से बाहर नहीं आ पाया था। इकलौते जवान बेटे को खोने का गम परिवार के हर शख्स के चेहरे पर दिख रहा था। शहीद के पिता फैयाज अहमद पर्रे बात करने की स्थिति में भले ही नहीं थे, लेकिन देश के लिए बेटे की शहादत का गर्व साफ झलक रहा था। 


उमर फैयाज के पिता से जब अमर उजाला की टीम ने बात करने के लिए कहा तो उनके ताया अब्दुल रजाक ने कहा कि वह बात करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए मैं आपको सब बताता हूं, लेकिन उमर के पिता ने कहा पूछिए क्या पूछना है, लेकिन जो मैं कहूं, वही लिखना। पिता ने कहा फैयाज सेना में कमीशन होने के बाद पहली बार घर छुट्टी पर आया था। पढ़ें पूरी बातचीत। 
Umar Fayaz father speaks with amar ujala
Umar Fayaz Family - फोटो : Amar Ujala
उसके मामा की बेटी की शादी थी, जिसमें शिरकत करने बड़े चाव से घर आया। एक माह की छुट्टी थी। 25 मई को वापस यूनिट अखनूर में जाना था, लेकिन 9 मई को आतंकियों ने उनके लाल को उनसे छीन लिया। पिता ने बताया कि गम नहीं देश के लिए बेटे के कुर्बान होने का, लेकिन दुख है इस बात का कि छुुट्टी पर घर ही नहीं आया होता। उन्होंने बताया कि शुरू में जब वह सेना में भर्ती के लिए गया तो मैंने कहा, मत जाओ, लेकिन उसने कहा कि मेरा सपना है सेना में जाने का।
Umar Fayaz father speaks with amar ujala
Umar Fayaz - फोटो : Amar Ujala

बेटे को खो चुके पिता अभी भी आतंकियों से बदले की भावना नहीं रखते। वह चाहते हैं कि आतंकी अपना गुनाह कबूल करें। सजा ऊपर वाला खुद तय करेगा। मैंने अपना बेटा खो दिया है, अब वह वापस तो आएगा नहीं। पिता ने घाटी के खराब हालात पर पूछने पर बताया कि अगर उनका बेटा जिंदा होता तो वह जरूर यहां के हालात सुधार देता, क्योंकि स्थानीय होने के नाते वह यहां के माहौल को अच्छी तरह जानता था। कश्मीरी अफसरों को ही यहां सेना में तैनाती मिलनी चाहिए, ताकि यहां के हालात सुधर सकें। 


 
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Umar Fayaz father speaks with amar ujala
Umar Fayaz - फोटो : Amar Ujala

सेना ने उन्हें बहुत कुछ दिया। सेना के अधिकारी हमारा दुख बांटने आए, लेकिन राजनेता नहीं आए, इसका दुख रहेगा। सेना ने हमें मदद का आश्वासन दिया है। चाहता हूं कि सेना में बेटियों को नौकरी मिले। देश भर में उनके बेटे के समर्थन में लोगों के आने पर खुशी हुई। मुंबई और दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला, मुझे इस पर गर्व है। सेना की ओर से आर्मी गुडविल स्कूल का नाम उनके बेटे के नाम पर करने से भी गर्व हुआ। लोग अब हमेशा उनके बेटे को याद रखेंगे।


 
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Umar Fayaz father speaks with amar ujala
Umar Fayaz - फोटो : Amar Ujala

उमर फैयाज के मामा की चार बेटियां हैं, जो सिर्फ उमर को ही अपना भाई मानती थीं। मामा की ही बेटी की शादी में शरीक होने उमर मामा के घर आया था। उमर के चाचा फयाज अहमद पर्रे ने बताया कि 9 मई की रात 10 बजेे उमर को आतंकियों ने अगवा किया और 11 बजे के करीब गोलियाें की आवाज आई। सुबह गोलियों से छलनी शव लिा तो इलाके के डाक्टर ने कहा कि उमर का शव मिला है। यह सुनकर मैं भागा गया, क्योंकि मेरे बेटे का नाम भी उमर याकूब है, लेकिन वहां देखा तो उमर फैयाज शहीद हो चुका था।

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