Exclusive: गर्व से शहीद फयाज के पिता बोले 'फख्र है कि बेटा हिंदुस्तान के लिए शहीद हुआ'
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बेटे को खो चुके पिता अभी भी आतंकियों से बदले की भावना नहीं रखते। वह चाहते हैं कि आतंकी अपना गुनाह कबूल करें। सजा ऊपर वाला खुद तय करेगा। मैंने अपना बेटा खो दिया है, अब वह वापस तो आएगा नहीं। पिता ने घाटी के खराब हालात पर पूछने पर बताया कि अगर उनका बेटा जिंदा होता तो वह जरूर यहां के हालात सुधार देता, क्योंकि स्थानीय होने के नाते वह यहां के माहौल को अच्छी तरह जानता था। कश्मीरी अफसरों को ही यहां सेना में तैनाती मिलनी चाहिए, ताकि यहां के हालात सुधर सकें।
सेना ने उन्हें बहुत कुछ दिया। सेना के अधिकारी हमारा दुख बांटने आए, लेकिन राजनेता नहीं आए, इसका दुख रहेगा। सेना ने हमें मदद का आश्वासन दिया है। चाहता हूं कि सेना में बेटियों को नौकरी मिले। देश भर में उनके बेटे के समर्थन में लोगों के आने पर खुशी हुई। मुंबई और दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला, मुझे इस पर गर्व है। सेना की ओर से आर्मी गुडविल स्कूल का नाम उनके बेटे के नाम पर करने से भी गर्व हुआ। लोग अब हमेशा उनके बेटे को याद रखेंगे।
उमर फैयाज के मामा की चार बेटियां हैं, जो सिर्फ उमर को ही अपना भाई मानती थीं। मामा की ही बेटी की शादी में शरीक होने उमर मामा के घर आया था। उमर के चाचा फयाज अहमद पर्रे ने बताया कि 9 मई की रात 10 बजेे उमर को आतंकियों ने अगवा किया और 11 बजे के करीब गोलियाें की आवाज आई। सुबह गोलियों से छलनी शव लिा तो इलाके के डाक्टर ने कहा कि उमर का शव मिला है। यह सुनकर मैं भागा गया, क्योंकि मेरे बेटे का नाम भी उमर याकूब है, लेकिन वहां देखा तो उमर फैयाज शहीद हो चुका था।