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सपनों और फिल्मों में दिखने वाले नजारे जी सकते हैं आप भी, रोमांच से भरा लद्दाख का चादर ट्रैक
Mon, 24 Dec 2018 01:11 PM IST
Trainee au entertainment
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Trainee au entertainment
Updated Mon, 24 Dec 2018 01:11 PM IST
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leh ladakh
- फोटो : अमर उजाला
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बर्फ से लकदक पहाड़। शीशे जैसी बर्फ की चादर पर चलना। सिर उठाकर देखो तो मानो आसमान इतना करीब, जितना कभी नहीं था। चादर ट्रैक की खूबसूरती को बयां करने के लिए शायद इससे बेहतर शब्द नहीं होंगे। जम चुकी जंस्कार नदी पर बर्फ की चादर ने इस ट्रैक को चादर ट्रैक का नाम दिया है।
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स्थानीय लोग बताते हैं कि चादर ट्रैक सदियों से स्थानीय लोगों द्वारा खानपान की व्यवस्था और व्यापार के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। बर्फबारी के बाद जब लेह से जंस्कार कट जाता है, तो यह पुराना ट्रैक ही जोड़े रखता है। पल-पल बदलता मौसम हो या फिर टूटती-बनती नदी पर जमी बर्फ, इस मार्ग पर जोखिम बढ़ा देते हैं। एक ओर चट्टानें तो दूसरी ओर नदी पर जमीं बर्फ पर कभी भी पैर फिसलने का डर भी होता है।
ट्रैकिंग के दौरान बर्फ पर पैर फिसलने से नदी में धंसने का भी खतरा बना रहता है। लेकिन रोमांच प्रेमी इस सबकी परवाह किए बिना जीवन के अभूतपूर्व अनुभव हासिल करने पहुंचते हैं। वहां न तो मोबाइल का नेटवर्क होता है और न ही संपर्क का कोई दूसरा साधन।
ट्रैकिंग के दौरान बर्फ पर पैर फिसलने से नदी में धंसने का भी खतरा बना रहता है। लेकिन रोमांच प्रेमी इस सबकी परवाह किए बिना जीवन के अभूतपूर्व अनुभव हासिल करने पहुंचते हैं। वहां न तो मोबाइल का नेटवर्क होता है और न ही संपर्क का कोई दूसरा साधन।
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- फोटो : अमर उजाला
दिन 1- हवाई जहाज से लेह पहुंचें
ऊंचाई 11,400 फुट
आकर्षण का केंद्र नेरक का झरना
स्थानीय लोगों के अनुसार नेरक शब्द दरअसल नर्क शब्द से लिया गया है। चूंकि चादर ट्रैक का नेरक तक सफर जिंदगी और मौत के बीच का है। ऐसे में स्थानीय लोग इस पड़ाव को नेरक के नाम से जानते हैं। लेकिन नेरक जितना डरावना है, उतना ही खूबसूरत भी है। यहां के जमे झरनों को देखकर किसी दूसरी दुनिया में होने का अहसास होता है।
ऊंचाई 11,400 फुट
आकर्षण का केंद्र नेरक का झरना
स्थानीय लोगों के अनुसार नेरक शब्द दरअसल नर्क शब्द से लिया गया है। चूंकि चादर ट्रैक का नेरक तक सफर जिंदगी और मौत के बीच का है। ऐसे में स्थानीय लोग इस पड़ाव को नेरक के नाम से जानते हैं। लेकिन नेरक जितना डरावना है, उतना ही खूबसूरत भी है। यहां के जमे झरनों को देखकर किसी दूसरी दुनिया में होने का अहसास होता है।
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दिन 2- चिलिंग से होते हुए गाड़ी के जरिए 65 किलोमीटर का तिलत सुमडो तक सफर
ऊंचाई - 11400 से 10390 फुट
रात टेंट में गुजारें
यह सामान पास होना जरूरी
ट्रैकर्स को गाइड कई तरह की सलाह देते हैं। इनमें 50-60 किलो का बैक पैक, रेन कवर, एनर्जी बार, ओआरएस, व्यक्तिगत टार्च, एक लीटर की बॉटल, दो ट्रैक पेंट (पूरी लंबाई की), थर्मल इनर, दो ट्रैक टी शर्ट, ऊनी स्वेटर और जैकेट के अलावा दो वाटर प्रूफ हैंड गल्वस, ऊनी मोजे, टायलेट पेपर, तौलिया, सन ग्लासेज, सन स्क्रीन लोशन और लिप गार्ड के साथ-साथ ट्रैकिंग के लिए मेडिकल किट और वॉकिंग स्टिक रखना जरूरी है। ट्रैकिंग पर जाने से पूर्व डाक्टरी सलाह जरूरी है।
ऊंचाई - 11400 से 10390 फुट
रात टेंट में गुजारें
यह सामान पास होना जरूरी
ट्रैकर्स को गाइड कई तरह की सलाह देते हैं। इनमें 50-60 किलो का बैक पैक, रेन कवर, एनर्जी बार, ओआरएस, व्यक्तिगत टार्च, एक लीटर की बॉटल, दो ट्रैक पेंट (पूरी लंबाई की), थर्मल इनर, दो ट्रैक टी शर्ट, ऊनी स्वेटर और जैकेट के अलावा दो वाटर प्रूफ हैंड गल्वस, ऊनी मोजे, टायलेट पेपर, तौलिया, सन ग्लासेज, सन स्क्रीन लोशन और लिप गार्ड के साथ-साथ ट्रैकिंग के लिए मेडिकल किट और वॉकिंग स्टिक रखना जरूरी है। ट्रैकिंग पर जाने से पूर्व डाक्टरी सलाह जरूरी है।
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दिन 3- तिलत सुमडो से शिंगारा कोमा तक 10 किलोमीटर ट्रेकिंग
ऊंचाई-10390 से 10550 फुट
रात टेंट में ही गुजारें
ऊंचाई-10390 से 10550 फुट
रात टेंट में ही गुजारें