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जम्हूरियत की मजबूती से खौफ में आतंकी, अजय पंडिता से लेकर वसीम बारी की हत्या के पीछे ये है वजह

Fri, 10 Jul 2020 06:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 10 Jul 2020 06:20 PM IST
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Terrorists are plotting To stir up valley by killing leaders
अजय पंडिता, वसीम बारी व उनके भाई-पिता की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

आतंकी तंजीमों के शीर्ष कमांडरों के सफाए और लगातार ध्वस्त हो रहे नेटवर्क से बौखलाए आतंकी नेताओं की हत्याओं करने पर आमादा हो गए हैं। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दिनों से लेकर हाल के वर्षों तक ज्यादातर सियासी हत्याएं चुनावी वर्ष में हुई हैं लेकिन आतंकी वारदातों का ऐसा सिलसिला अब बिना चुनाव के भी तेज हो गया है।

Terrorists are plotting To stir up valley by killing leaders
सरपंच अजय पंडिता की हत्या - फोटो : सोशल मीडिया

एक महीने में चार हत्याएं हो चुकी हैं। भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या से एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी।


 
Terrorists are plotting To stir up valley by killing leaders
Sheikh Wasim Bari, Bashir Ahmed and Omar Bari murdered - फोटो : अमर उजाला

घाटी में जम्हूरियत की मजबूती में जुटे नेताओं, कार्यकर्ताओं से लेकर पंचायती नुमाइंदों पर पहले भी आतंकी हमले होते रहे हैं। 2011 से अब तक 19 पंचायती नुमाइंदों की हत्या की जा चुकी है। वहीं, वर्ष 1990 से 2009 तक 587 सियासी लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।

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Terrorists are plotting To stir up valley by killing leaders
Sheikh Wasim Bari, Bashir Ahmed and Omar Bari murdered - फोटो : अमर उजाला

चुनावी वर्ष में सबसे ज्यादा घटनाएं रिपोर्ट हुईं। सर्वाधिक राजनीतिक हत्याएं चुनावी वर्ष 2002 में हुई थीं। इसके अलावा चुनावी वर्ष 1996 में 75, 1998 में 45, 1999 में 53 और 2004 में 60 राजनीतिक हत्याएं हुईं।




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Terrorists are plotting To stir up valley by killing leaders
Sheikh Wasim Bari, Bashir Ahmed and Omar Bari murdered - फोटो : अमर उजाला

जमीनी स्तर पर सियासी गतिविधियां आतंकियों से बर्दाश्त नहीं हो रही हैं। एक माह में चार हत्याएं दर्शाती हैं कि जम्हूरियत की मजबूती में जुटे लोग आतंकियों के निशाने पर हैं। 2011 से अब तक 19 पंचायती नुमाइंदे हमलों में मारे गए हैं। पंचायती जन प्रतिनिधियों की सुरक्षा का प्रस्ताव एडीजीपी सुरक्षा के पास लंबित है। जम्हूरियत के लिए जान दांव पर लगाने वालों को तत्काल सुरक्षा दी जानी चाहिए।

-अनिल शर्मा, अध्यक्ष, ऑल जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस

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