अनुच्छेद-370 और 35-ए हटाए जाने के बाद से पाक प्रयोजित आतंकवाद लगातार हताशा के दौर में है। इसी बौखलाहट में पाकिस्तान आतंकी साजिश रचने से बाज नहीं आ रहा है। कहने को तो सीमा पर संघर्षविराम लागू है लेकिन पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ, ड्रोन और ड्रग्स के जरिए घाटी में जहर घोलने की साजिशें भी जारी हैं। लेकिन नियंत्रण रेखा(एलओसी) पर भारतीय सेना और अंतरराष्ट्रीय सीमा(आईबी) पर बीएसएफ की मुस्तैदी के चलते पाकिस्तानी को हर बार मुंह की खानी पड़ती है।
Terrorism in kashmir: आतंकियों के लिए काल बना 2022, अब तक 118 दहशतगर्दों का सफाया, पिछले साल जून तक 55 हुए थे ढेर
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आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि पुलवामा मुठभेड़ में दो आतंकी मार गए हैं। इनमें से एक की पहचान माजिद नजीर के तौर पर हुई है। आतंकी माजिद जैश-ए-मोहम्मद के साथ जुड़ा था और सब इंस्पेक्टर फारूक मीर की हत्या में शामिल था। आईजी ने कहा कि इस साल अब तक 118 आतंकी मारे जा चुके हैं। इसमें से 32 आतंकी पाकिस्तानी हैं। 118 आतंकियों में से 77 लश्कर-ए-तैयबा और 26 जैश-ए-मोहम्मद के हैं। पिछले साल इस अवधि तक 55 आतंकी मारे गए थे, जिसमें दो पाकिस्तानी थे।
एसएसपी पुलवामा ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुज्जन इलाके के कई घरों में तलाशी ली थी। इसी दौरान छिपे हुए दो आतंकियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। दोनों आतंकी मारे गए हैं। जिसमें से एक की पहचान पुलवामा निवासी आबिद और दूसरे की पहचान माजिद के रूप में हुई है। माजिद पंपोर का रहना वाला था। यह पुलिस सब इंस्पेक्टर फारूक मीर की हत्या में शामिल था।
18 जून, शनिवार को जम्मू कश्मीर पुलिस के सब इंस्पेक्टर फारूक मीर का गोलियों से छलनी शव उनके घर के पास धान के खेत में मिला था। वह शुक्रवार देर शाम खेत में काम करने गए थे। इस दौरान आतंकियों ने उन पर हमला किया था। वह 23 बटालियन में तैनात थे।
घाटी में आतंकियों के खिलाफ ही अभियान नहीं चल रहा, बल्कि आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए उनके पारिस्थितिकी तंत्र पर चोट की जा रही है ताकि बंदूक उठाने के लिए युवाओं को कोई बरगला न सके। इसी रणनीति के तहत जमात से जुड़े स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है। आरोप है कि इन स्कूलों से हिंसा का दुष्चक्र रचा जाता रहा है। वर्ष 2008, 2010 व 2016 की हिंसा में इन स्कूलों की भूमिका को एसआईए की जांच में संदेह के घेरे में रखा गया है।