स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति एवं दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को हुआ था। राधाकृष्णन की याद में भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष शिक्षक दिवस बीते वर्षों की अपेक्षा काफी खास हो गया है। इसकी वजह है कि कोरोना काल में शिक्षक वारियर्स के तौर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए सामुदायिक कक्षाएं भी चला रहे हैं। अगली स्लाइड में जम्मू-कश्मीर के कुछ ऐसे ही शिक्षकों के बारे में जानिए, इसके साथ ही देखिए अद्भुत तस्वीरें...
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Teachers Day 2020
- फोटो : बासित जरगर
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले का कंडी इलाका चंदूसा कोरोना महामारी के दौरान एक ऐसे गांव के तौर पर उभरकर सामने आया जहां करीब 112 अध्यापकों ने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कम्युनिटी क्लास का बीड़ा उठाया है। इस मिशन की शुरुआत करने वाले उमर रशीद भट के अनुसार शुरू में कुछ ही अध्यापक थे। लेकिन देखते ही देखते ये टीम बड़ी होती गई और आज उन्हें खुशी होती है कि वह बच्चों के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे रहे हैं।
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श्रीनगर से करीब 65 किलोमीटर दूर चंदूसा पछाड़ के रहने वाले अध्यापक उमर रशीद भट (30) ने बताया कि कोविड-19 महामारी के शुरू होने के बाद जब सरकार ने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने का फैसला लिया तो उन्होंने भी अपने इलाके के बच्चों की मदद करने की ठानी।
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उमर ने कहा कि उनके इलाके में मोबाइल नेटवर्क की काफी दिक्कत रहती है। साथ ही उनके द्वारा किए गए एक सर्वे में यह पाया गया कि इलाके में करीब 30 प्रतिशत ही ऐसे लोग हैं जिनके पास स्मार्ट फोन था। इसलिए उन्होंने सीईओ और जिले के डीसी से अनुमति लेने के बाद इलाके में कम्युनिटी क्लास की शुरुआत की गई।
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- फोटो : बासित जरगर
उमर ने बताया कि मई के पहले सप्ताह में उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर कम्युनिटी क्लास शुरू की। शुरू में केवल 12 ही अध्यापक उनके साथ जुड़े। उन्होंने अपने मोहल्लों में इस मिशन की शुरुआत की। लेकिन मई के महीने के अंत तक उनके साथ करीब 112 अध्यापक जुड़ गए। चंदूसा इलाके के इन शिक्षकों ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे पूरा कश्मीर संभाग सराह रहा है।