महाराजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर का भारत में विलय कर पूरे उपमहाद्वीप की सियासत को बदलकर कर रख दिया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये दिन एक बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जाने कैसे महाराजा हरि सिंह के हस्ताक्षर के बाद कश्मीर बना भारत संघ का हिस्सा- तस्वीरें ।
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महाराजा हरि सिंह
- फोटो : File Photo
दरअसल, 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शासन से भारत को आजादी मिलने के बाद जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत और न ही पाकिस्तान के साथ रियासत के विलय का कोई संकेत नहीं दिया।
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पाकिस्तान के विलय के प्रस्तावों को महाराजा हरि सिंह ने ठुकरा दिया। वह पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर के विलय के सख्त खिलाफ थे।
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महाराजा हरि सिंह के पौत्र एवं जम्मू कश्मीर विधान परिषद के सदस्य अजातशत्रु सिंह के अनुसार महाराजा हरि सिंह दूरदर्शी और महान देश भक्त थे। 1925 में उन्होंने लंदन में हुए गोलमेज सम्मेलन में भारत की स्वतंत्रता का खुला पक्ष लिया था।
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भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद और भारत और पाकिस्तान में बंटबारे के बाद महाराजा हरि सिंह भारत में विलय करना या रियासत को स्वतंत्र रखने के पक्षधर थे। पाकिस्तान के तो वह खिलाफ थे।