शैलेंद्र मिश्रा को एनआईए में एसपी बनाया गया है। इससे पहले वह कठुआ एसएसपी थे। शैलेंद्र मिश्रा को कश्मीर मामलों की भी अच्छी जानकारी है। वहीं कठुआ एसएसपी रहते हुए उन्होंने कई ऐसे कार्य किए जिसके लिए जिले की जनता आज भी उनकी मुरीद है। इंसान को न्याय दिलाने के साथ ही शैलेंद्र का पशु प्रेम भी जगजाहिर है। इसके साथ ही भाषाओं पर उनकी पकड़ ने कई बवालों को टाला है। एक ऐसा ही किस्सा है 8 मई साल 2020 का।
2 of 5
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा
- फोटो : सोशल मीडिया
कठुआ जिले में 8 मई को चिनाब टेक्सटाइल मिल में आधा वेतन मिलने पर मजदूर भड़क उठे। उन्होंने जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे से सटी इकाई में घुसकर तोड़फोड़ की। इसी दौरान डॉ. शैलेंद्र मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने कुछ ऐसे शब्द कहे कि उत्पात मचा रहे हजारों की संख्या में मजदूर बिल्कुल शांत हो गए। इस बवाल को रोकने में भाषा का जादू चला। मजदूरों से उन्हीं की भाषा में बात करके एसएसपी ने एक बड़ा बवाल टाल दिया। साथ ही आक्रोशित मजदूरों को अपना मुरीद बना लिया।
3 of 5
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस और मजदूरों के बीच हुई झड़प में काफी नुकसान भी हुआ। आक्रोशित भीड़ को संभालना पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा था। इसी बीच पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज से श्रमिक और भड़क गए, उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। इसके साथ ही पुलिस की जिप्सी सहित वहां खड़े कई वाहनों को तोड़ दिया। पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया। इस दौरान पुलिस के जवान घायल हुए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पुलिसवालों को अपनी गाड़ी छोड़ पीछे हटना पड़ा।
4 of 5
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने खुद कमान संभाली। आक्रोशित भीड़ को कैसे काबू करना है, उनकी बात कैसी सुननी है और उनको कैसे समझाना है, इसकी बेहतरीन मिसाल शैलेंद्र मिश्रा ने पेश करते हुए मजदूरों से उनकी ही भाषा में बात करनी शुरू की। लाउडस्पीकर से निकले भोजपुरी के शब्द जैसे ही मजदूरों के कानों तक पहुंचे वह एकदम शांत से हो गए।
5 of 5
डॉ. शैलेंद्र मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
उस दौरान मजदूरों को लगा कि उनका कोई अपना ही उनसे बात करने आया है। इसी दौरान उन्होंने देखा कि शैलेंद्र मिश्रा उनसे शांत रहने और अपना पक्ष रखने की भोजपुरी में अपील कर रहे हैं। मिश्रा को आठ से नौ भाषाओं का ज्ञान है और इनमें से एक भाषा का जादू उन्होंने कठुआ में भी चलाया।