जम्मू-कश्मीर के बेगपोरा में हिजबुल कमांडर रियाज अहमद नायकू मारा गया है। नायकू घाटी का सबसे वांछित आतंकी था। उस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी था। मंगलवार रात सुरक्षाबलों को जानकारी मिली की रियाज नायकू इलाके में मौजूद है। साथ ही बड़ी वारदात की साजिश रच रहा है। इसी सूचना के आधार पर सेना ने इलाके की घेरांबदी की। खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान सेना ने आतंकियों से समर्पण करने की बात कही। बावजूद इसके वे गोलियां बरसाते रहे।
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भारतीय सेना
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि घाटी को आतंक मुक्त करने के लिए सेना ऑपरेशन ऑल आउट चला रही है। साथ ही सेना ऑपरेशन मां भी चलाती है। इसके तहत भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाता है। कई बार इस ऑपरेशन से सेना को सफलता मिलने के साथ ही उक्त परिवारों को उनका बेटा मिल जाता है। वहीं ऑपरेशन मां का भी अवहेलना करने पर वही हश्र होता है जो आज यानी कि बुधवार को रियाज नायकू का हुआ।
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रियाज अहमद नायकू घाटी का सबसे वांछित आतंकी था। मुठभेड़ में सबजार भट्ट की मौत के बाद से इसने कमान संभाली थी। दिसंबर 2012 में हिज्ब में शामिल हुआ और महज पांच सालों में संगठन के प्रमुख बन गया। वह तकनीक में महारत रखता था। एक आतंकी के जनाजे में शामिल होने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को समर्थन देने की बात कही थी।
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नायकू सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 2016 में पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की मौत के बाद आना शुरू हुआ था। उसके सिर पर 12 लाख रुपए का इनाम था। अवंतीपुरा के दुरबग के नायकू मोहल्ले का निवासी नायकू घाटी के वांछनीय आतंकियों की A++ श्रेणी में आता था।
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उसने घाटी में सब्जार भट की मौत के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया का पद संभाला था। नायकू को पूरी घाटी में हिजबुल का कमांडर माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों ने इससे पहले उसे कई बार घेरा था, लेकिन हर बार वह किसी तरह बचकर भाग निकलने में सफल हो जाता था।