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जम्मू-कश्मीर के शहरी इलाकों में लगेगा प्रॉपर्टी टैक्स, नगर निकायों की बढ़ेगी आय
Tue, 16 Feb 2021 04:24 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 16 Feb 2021 04:24 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
प्रदेश में अब शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी टैक्स लगेगा। इसके लिए इलाके के सर्किल रेट को टैक्स निर्धारण का आधार बनाया जाएगा। शहरी विकास विभाग की ओर से सोमवार को इस आशय का आदेश जारी किया गया है। आदेश के दायरे में प्रदेश के दो नगर निगम जम्मू व श्रीनगर के साथ ही छह नगर पालिका और 70 नगर परिषद आएंगे। टैक्स लगने के बाद नगर निकायों की आमदनी बढ़ेगी। करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में आएंगे, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रॉपर्टी टैक्स के निर्धारण का सर्किल रेट मुख्य आधार होगा। इसके अलावा निर्माण की प्रकृति, उपयोग के प्रकार, संपत्ति की आयु आदि भी टैक्स निर्धारण के बिंदु होंगे। अक्तूबर 2020 में गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिका के जरिये प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का अधिकार दिया था। इसके लिए तमाम संशोधन किया गया था। इसमें प्रावधान किया गया कि जमीन के वार्षिक मूल्यांकन से 15 फीसदी से अधिक टैक्स नहीं होगा।
सभी जमीन व भवन आएंगे दायरे में
जम्मू-कश्मीर म्युनिसिपल एक्ट 2000 और जम्मू-कश्मीर म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 2000 में किए गए संशोधनों के अनुसार निकाय सीमा के अंतर्गत आने वाली सभी जमीनें, भवन, खाली जमीन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाएगा। इसमें रिहायशी मकान, दुकान, कामर्शियल कांप्लेक्स, टावर सभी आएंगे।
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प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर विरोध के स्वर होंगे तेज
जम्मू-कश्मीर में प्रॉपर्टी टैक्स लगाए जाने पर विरोध के स्वर काफी तेज होंगे। नेकां, पीडीपी, कांग्रेस, अपनी पार्टी, पैंथर्स पार्टी के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों के भी विरोध में आने की संभावना है। इसे लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
आय बढ़ेगी, विकास कार्यों में आएगी तेजी
टैक्स लगाने का उद्देश्य निकायों की आय में इजाफा करना है। मौजूदा समय में निकायों के आय के स्त्रोत काफी सीमित हैं। केंद्र से मिलने वाली ग्रांट के दम पर ही विकास हो रहा है। ग्रांट रुकने पर विकास कार्य भी हांफ रहे हैं। निकायों के अपने स्त्रोतों से भी होने वाली आय नाकाफी है। अब टैक्स लगने से आय करोड़ों में पहुंचेगी। इससे विकास कार्यों को तेजी से करवाया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें- जम्मू शहर चार स्तरीय सुरक्षा घेरे में, जानिए इस साल अब तक कितने आतंकी पकड़े
आवास व शहरी विकास विभाग की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का आदेश मिला है। इस पर गाइडलाइन तैयार की जाएगी। इसके बाद टैक्स स्लैब और सर्वे का काम किया जाएगा। बाद में नगर निगम सदन में तय होगा कि इसे कैसे लागू करना है। - अवनी लवासा, आयुक्त, नगर निगम
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सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रॉपर्टी टैक्स के निर्धारण का सर्किल रेट मुख्य आधार होगा। इसके अलावा निर्माण की प्रकृति, उपयोग के प्रकार, संपत्ति की आयु आदि भी टैक्स निर्धारण के बिंदु होंगे। अक्तूबर 2020 में गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिका के जरिये प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का अधिकार दिया था। इसके लिए तमाम संशोधन किया गया था। इसमें प्रावधान किया गया कि जमीन के वार्षिक मूल्यांकन से 15 फीसदी से अधिक टैक्स नहीं होगा।
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सभी जमीन व भवन आएंगे दायरे में
जम्मू-कश्मीर म्युनिसिपल एक्ट 2000 और जम्मू-कश्मीर म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 2000 में किए गए संशोधनों के अनुसार निकाय सीमा के अंतर्गत आने वाली सभी जमीनें, भवन, खाली जमीन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाएगा। इसमें रिहायशी मकान, दुकान, कामर्शियल कांप्लेक्स, टावर सभी आएंगे।
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प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर विरोध के स्वर होंगे तेज
जम्मू-कश्मीर में प्रॉपर्टी टैक्स लगाए जाने पर विरोध के स्वर काफी तेज होंगे। नेकां, पीडीपी, कांग्रेस, अपनी पार्टी, पैंथर्स पार्टी के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों के भी विरोध में आने की संभावना है। इसे लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
आय बढ़ेगी, विकास कार्यों में आएगी तेजी
टैक्स लगाने का उद्देश्य निकायों की आय में इजाफा करना है। मौजूदा समय में निकायों के आय के स्त्रोत काफी सीमित हैं। केंद्र से मिलने वाली ग्रांट के दम पर ही विकास हो रहा है। ग्रांट रुकने पर विकास कार्य भी हांफ रहे हैं। निकायों के अपने स्त्रोतों से भी होने वाली आय नाकाफी है। अब टैक्स लगने से आय करोड़ों में पहुंचेगी। इससे विकास कार्यों को तेजी से करवाया जा सकेगा।
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आवास व शहरी विकास विभाग की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का आदेश मिला है। इस पर गाइडलाइन तैयार की जाएगी। इसके बाद टैक्स स्लैब और सर्वे का काम किया जाएगा। बाद में नगर निगम सदन में तय होगा कि इसे कैसे लागू करना है। - अवनी लवासा, आयुक्त, नगर निगम