जम्मू-कश्मीर में बांस उद्योग को उत्तर पूर्व राज्य की तर्ज पर बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। प्रदेश की हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग की टीमें असम का दौरा करेंगी और वहां के उद्योग मॉडल को समझेंगी। यह टीमें बांस उद्योग से जुड़े लोगों, सोसायटी और सरकारी विभागों के साथ मिलकर बांस उद्योग मॉडल को समझेंगी।
विभाग की टीमें अगले सप्ताह तक असम जाएंगी। जम्मू-कश्मीर में बांस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लिए प्रदेश सरकार ने ईस्ट एंड बैंबू डेवलपमेंट काउंसिल (एनईसीबीडीसी) के साथ समझौता किया है।
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बांस की बोतलें
- फोटो : सोशल मीडिया
जम्मू-कश्मीर को बांस उद्योग में एक मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा, इससे बांस की खेती से जुड़े किसानों और कारीगरों को आर्थिक रूप में सशक्त किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग की टीम असम में बांस उद्योग के मॉडल को समझने जाएंगी।
इसमें बांस की खेती, प्रोडक्शन, मार्केट सहित अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जम्मू-कश्मीर में कठुआ, सांबा, रियासी, उधमपुर, राजोरी और कश्मीर के कुछ हिस्सों में बांस की पैदावार होती है, जिसे और बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश स्तर पर बैंबू मिशन को भी शुरू किया गया है। बांस उद्योग को बढ़ावा मिलने से किसानों के साथ कारीगरों को रोजगार मिलेगा।
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हैंडक्राफ्ट और हैंडलूम विभाग की टीमें असम के बांस उद्योग मॉडल को समझने जाएंगी। इसमें बांस उद्योग से जुुड़े लोगों औ अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा करेंगी। मॉडल का अध्ययन करने के बाद उसी तर्ज पर प्रदेश में बांस उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। -विकास गुप्ता, निदेशक हैंडक्राफ्ट और हैंडलूम निदेशालय जम्मू