कश्मीर घाटी के 10 जिलों में सोमवार को 70 दिन बाद मोबाइल फोन की घंटी एक बार फिर सुनाई देने लगी। इससे 40 लाख पोस्टपेड मोबाइल फोन धारकों को सुविधा का लाभ मिला है। फिलहाल, केवल पोस्टपेड कनेक्शन पर वॉयस कॉल और एसएमएस सेवा शुरू की गई है। इसके साथ ही लोगों का कहना है कि पोस्टपेड मोबाइल सेवा शुरू होने से काफी राहत मिली है, लेकिन सेवा शुरू होते ही एक समस्या भी मुंह बाये खड़ी है।
कश्मीर में मोबाइल की घंटी बजी तो लोग बोले 'शुक्रिया', साथ ही कहा- सरकार इस समस्या का भी करो समाधान
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एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि पोस्टपेड मोबाइल सेवा शुरू होते ही बिल भेज दिया गया है, बिल जमा न होने के कारण आउटगोइंग सेवा बंद कर दी गई है। इससे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि सरकार घाटी में अमन के लिए इतना कुछ कर रही तो साथ ही हम लोगों की इस समस्या पर भी विचार करे।
पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही राज्य में संचार के साथ अन्य पाबंदियां लगा दी गई थीं। जैसे-जैसे हालात सुधरे, पाबंदियां खत्म कर दी गईं। जम्मू संभाग में सबसे पहले मोबाइल फोन बहाल कर दिए गए। कश्मीर संभाग में सितंबर में लैंडलाइन फोन बहाल कर दिए गए थे।
एक अन्य स्थानीय मोहम्मद सदीक ने बताया कि मोबाइल के बहाल होने से फायदा होगा। हाल ही में उनके पिता हो दिल का दौरा पड़ा था और वो समय पर एंबुलेंस नहीं बुला पाए थे। वहीं राजबाग के एक परिवार में खुशी का माहौल था। इसी परिवार के सदस्य बशीर अहमद ने कहा कि आज का दिन ईद से कम नहीं है।
ऑल पार्टी सिख कोआर्डिनेशन कमेटी ने कश्मीर में पोस्टपेड मोबाइल सेवा के बहाल करने का स्वागत किया। इस दौरान कमेटी के सदस्यों ने सरकार से घाटी में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा को बहाल करने की मांग की। कमेटी के चेयरमैन जगमोहन रैना ने कहा कि घाटी में इंटरनेट सेवा बंद होने से लोेग पैसों का लेनदेन नहीं कर पा रहे हैं।