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कश्मीर में नहीं मिली बारावफात का जुलूस निकालने की इजाजत, आतंकी हमले का भय पैदा करने के संकेत
Sun, 10 Nov 2019 09:45 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 10 Nov 2019 09:45 PM IST
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हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
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कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए रविवार को यहां न तो पैगम्बर मोहम्मद के जन्मदिन के जश्न में निकाले जाने वाले ईद-मिलाद-उन-नबी के बड़े जुलूस निकालने की इजाजत दी और न ही हजरत बल दरगाह की ओर ऐसे किसी बड़े जुलूस को जाने की अनुमति दी गयी।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध
- फोटो : बासित जरगर
अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले और बारावफात को देखते हुए एहतियातन हजरत बल दरगाह की ओर जाने वाली सभी सड़कों को एहतियातन सील कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार रात से ही पूरे जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू है।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध
- फोटो : बासित जरगर
प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए श्रीनगर के खोजे बाजार इलाके में हजरत नक्शबंद साहिब के दरगाह पर होने वाली पारंपरिक खोजे-दिगर की नमाज की भी अनुमति नहीं दी थी। हजरत बल दरगाह में पैगम्बर मोहम्मद के पवित्र अवशेष हैं। घाटी में सभी बड़े धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं मिली थी।
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संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध
- फोटो : बासित जरगर
दूसरी ओर जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले की घोषणा के बाद से शुक्रवार को स्थानीय ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सामूहिक प्रार्थना की अनुमति नहीं है।
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संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध
- फोटो : बासित जरगर
अधिकारियों ने बताया कि रविवार को 99वें दिन भी समूची घाटी में बाजार दोपहर तक कुछ ही घंटों के लिए खुले। उन्होंने बताया कि उपद्रवी और आतंकवादी अघोषित बंद का विरोध करने के लिए भय का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहां दुकानें खुलती हैं या सड़क किनारे रेहड़ी पटरी वाले अपना कारोबार करते हैं, वहां बंद को लागू करने लगातार प्रयास किया जा रहा है।