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जम्मू-कश्मीर में एक हफ्ता देरी से बरसेंगे बादल, मानसून देर से पहुंचने के आसार
Tue, 25 Jun 2019 07:45 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 25 Jun 2019 07:45 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में मौसम के उतार चढ़ाव के बीच राज्य में मानसून के देरी से पहुंचने के आसार हैं। इस साल अब तक कश्मीर संभाग में निरंतर अंतराल के बाद बारिश होती रही है, लेकिन जम्मू संभाग में प्री मानसून बारिश का असर नहीं दिखा है। जून का आखिरी पड़ाव चल रहा है, लेकिन संभाग में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। संभाग के प्रमुख हिस्सों में पारा चालीस डिग्री के आसपास रहा है।
मौसम विभाग श्रीनगर के निदेशक सोनम लोट्स के अनुसार जम्मू-कश्मीर में मानसून के निर्धारित से एक हफ्ता देरी से जुलाई के पहले हफ्ते में पहुंचने की उम्मीद है। मौसम के मिजाज के मुताबिक से थोड़ा आगे भी जा सकता है। केरल से मानसून पूरी तरह से अभी सक्रिय नहीं हुआ है, जिसका असर राज्य में दिखेगा। वर्ष 2018 में 28 जून को मानसून ने जम्मू-कश्मीर में दस्तक दी थी।
राज्य में अमूमन जून के आखिरी और जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून पहुंचता रहा है। जम्मू-कश्मीर से पहले मानसून देश के कई हिस्सों से होकर यहां पहुंचता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अभी मानसून में तेजी आने के आसार नहीं हैं। पिछले रिकार्ड के मुताबिक जम्मू संभाग में जुलाई और अगस्त माह में सबसे अधिक बारिश होती रही है। यह आंकड़ा 500 मिलीमीटर से ऊपर या इससे थोड़ा कम रहा है। मानसून के दौरान जम्मू और कश्मीर संभाग के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति रही है।
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कब कब राज्य में पहुंचा मानसून
2014 - 1 जुलाई
2015 - 24 जून
2016 - 21 जून
2017 - 3 जुलाई
2018 - 28 जून
2014 - 1 जुलाई
2015 - 24 जून
2016 - 21 जून
2017 - 3 जुलाई
2018 - 28 जून
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केरल से चलकर राज्य में पहुंचता है मानसून
मौसम विभाग श्रीनगर के अनुसार रियासत में मानसून की साउथ वेस्ट विंड (हवाएं) वे आफ बंगाल और अरेवियन समंद्र से आती हैं। यह देश में केरल से दाखिल होकर धीरे धीरे जेएंडके तक पहुंचती हैं। जेएंडके में पहुंचकर यह विंड आगे पाकिस्तान के साथ लगते इलाकों से होती हुई हिमालय में जाकर रुक जाती हैं। राज्य में मानसून करीब 30 जून को पहुंचकर 15 सितंबर तक सक्रिय रहता है। मानसून की विंड को साउथ वेस्ट विंड भी कहा जाता है। पहले इसे ट्रेड विंड कहा जाता था। मानसून की हवाएं अपने साथ नमी लेकर चलती हैं। इसी तरह 15 सितंबर से केसपियन सी (समुद्र, सभी ईरान-इराक के पास), मेडिटेरियन सी और ब्लैक सी से वेस्टर्न डिस्टरवेंस की हवाएं चलती हैं जो जेएंडके में वेस्टर्न डिस्टरवेंस का काम करने के साथ मानसून की हवाओं से टकरा कर उन्हें वापस भेजती हैं।
मौसम विभाग श्रीनगर के अनुसार रियासत में मानसून की साउथ वेस्ट विंड (हवाएं) वे आफ बंगाल और अरेवियन समंद्र से आती हैं। यह देश में केरल से दाखिल होकर धीरे धीरे जेएंडके तक पहुंचती हैं। जेएंडके में पहुंचकर यह विंड आगे पाकिस्तान के साथ लगते इलाकों से होती हुई हिमालय में जाकर रुक जाती हैं। राज्य में मानसून करीब 30 जून को पहुंचकर 15 सितंबर तक सक्रिय रहता है। मानसून की विंड को साउथ वेस्ट विंड भी कहा जाता है। पहले इसे ट्रेड विंड कहा जाता था। मानसून की हवाएं अपने साथ नमी लेकर चलती हैं। इसी तरह 15 सितंबर से केसपियन सी (समुद्र, सभी ईरान-इराक के पास), मेडिटेरियन सी और ब्लैक सी से वेस्टर्न डिस्टरवेंस की हवाएं चलती हैं जो जेएंडके में वेस्टर्न डिस्टरवेंस का काम करने के साथ मानसून की हवाओं से टकरा कर उन्हें वापस भेजती हैं।