छत्तीसगढ़ में हमले के बाद नक्सली जम्मू निवासी सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को अगवा कर ले गए हैं। नक्सलियों की कैद में सीआरपीएफ का जवान राकेश्वर सिंह मन्हास जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। परिवार सदमे हैं। नक्सलियों के कब्जे में राकेश्वर के होने की सूचना मिलते ही उनके आवास पर शुभचिंतकों का जमावड़ा लग गया। सुरक्षा बलों के साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं तथा रिश्तेदारों व आस-पड़ोस के लोगों ने पहुंचकर सांत्वना दी।
लापता नहीं अगवा : सीआरपीएफ जवान राकेश्वर को हमले के बाद अपने साथ लेकर गए नक्सली, अब कर रहे ये डिमांड
- राकेश्वर सिंह का परिवार तीन दिन से फोन कर रहा, लेकिन कोई उठा नहीं रहा
- राकेश्वर सिंह का परिवार तीन दिन से फोन कर रहा, लेकिन कोई उठा नहीं रहा
- परिवार की प्रधानमंत्री से अपील, सकुशल घर ले आओ
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राकेश्वर की मां और बहन का कहना है कि आठ दिन से उनकी बात नहीं हुई। राकेश्वर की एक छोटी बेटी भी है। पूरा परिवार हर पल नम आखों से बस एक ही दुआ कर रहा है कि वह किसी भी तरह सकुशल घर लौटकर आए। परिवार ने उप-राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि राकेश्वर को किसी भी कीमत पर जिंदा वापस लाया जाए। बता दें, नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के 20 से अधिक जवान शहीद हुए हैं। राकेश्वर को नक्सली अगवा कर ले गए हैं। केंद्र सरकार उनकी रिहाई के लिए प्रयास कर रही है। मूलरूप से ज्यौड़ियां के राकेश्वर का परिवार इस समय बरनाई इलाके में रह रहा है।
वीडियो कॉल से हमारी बात करवा दें
राकेश्वर सिंह का परिवार सरकार से एक ही अपील कर रहा है कि उनकी वीडियो कॉल के माध्यम से राकेश्वर बात करवाएं, ताकि उनको तसल्ली हो जाए कि वह सुरक्षित हैं।
सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दे, कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे
छत्तीसगढ़ में तैनात सीआरपीएफ के एक सूत्र ने बताया कि नक्सली राकेश्वर को बार-बार एक ही बात बोल रहे हैं कि वह सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ दे। उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। नक्सलियों ने अपना एक संदेश भी जारी किया है कि वह राकेश्वर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
पुलिस और सीआरपीएफ पहुंची राकेश्वर के घर
राकेश्वर के जम्मू स्थित घर पर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर के कमांडेंट प्रेम चंद्र गुप्ता और दोमाना के एसएचओ महेश शर्मा पहुंचे। राकेश्वर के परिवार को सीआरपीएफ की ओर से कहा गया है कि वह लगातार छत्तीसगढ़ सीआरपीएफ के संपर्क में हैं और राकेश्वर की रिहाई के लिए हर तरह का प्रयास किया जा रहा है।
2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे राकेश्वर
परिजनों का कहना है कि राकेश्वर 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। तीन महीने पहले ही उसकी छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग हुई थी। रविवार को हुए नक्सली हमले में नक्सलियों ने उन्हें अगवा कर लिया है। उसकी शादी सात साल पहले हुई और एक पांच साल की बेटी है। मां कुंती देवी और पत्नी मीनू ने केंद्र और राज्य सरकार से राकेश्वर को नक्सलियों के कब्जे से छुड़ाने की मांग की है। उनके पिता जगतार सिंह भी सीआरपीएफ में थे। उनका निधन हो चुका है। छोटा भाई सुमित कुमार प्राइवेट सेक्टर में काम करता है। बहन सरिता की शादी हो चुकी है।