12 नवंबर को जम्मू संभाग में रामकोट के मकवाल गांव में एक 17 वर्षीय युवक को मौत के घाट उतारने वाला आदमखोर तेंदुआ आखिर पकड़ लिया गया है। पिछले एक महीने में तेंदुए की लगातार इलाके में दस्तक जारी रही। वन्यजीव विभाग की ओर से इसे बीते माह ही आदमखोर घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद छह दिसंबर तक लगातार इसे मारने के लिए वन्यजीव विभाग ने अभियान छेड़ रखा था। इसके लिए विभाग की पूरी टीम के साथ स्थानीय लोग और पुलिस भी जुटी रही, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। इस कारण क्षेत्र के लोग खौफजदा थे।
आखिर पकड़ ही लिया गया आतंक का सबब बना ये आदमखोर तेंदुआ, दहशत से घरों में कैद थे लोग
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इस अवधि में उसने कई मवेशियों को भी अपना शिकार बनाया है। वन्यजीव विभाग की टीम गत माह से ही तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगा दिए थे। वहीं, कई बार तेंदुए के पंजों के निशान भी जंगल में देखे गए। आखिरकार मंगलवार सुबह वन्यजीव विभाग के एक पिंजरे में तेंदुआ फंस ही गया। वन्यजीव वार्डन राजन सिंह ने बताया कि रामकोट के नजदीक लगाए पिंजरे में कैद हुए तेंदुए को बेहोश करने के लिए जम्मू से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई। ट्रेंक्यूलाइजर की मदद से बेहोश करने के बाद उसे मांडा जम्मू शिफ्ट कर दिया गया है।
तेंदुए कई किलोमीटर के दायर में अपना दबदबा बनाकर रहते हैं। ज्ञात रहे कि पांच माह पूर्व भी बिलावर के लाहड़ी गांव में तेंदुए ने एक व्यक्ति को घर में घुसकर घायल कर दिया था, जिसकी जीएमसी जम्मू में मौत हो गई थी। वाइल्ड लाइफ विभाग के वार्डन राजन सिंह ने बताया कि तीन लाख की मुआवजा राशि मंगलवार को पीड़ित परिवार के खाते में डाल दी गई है।
नवंबर में आदमखोर तेंदुए ने रामकोट के मकवाल गांव में एक किशोर को मौत के घाट उतार दिया था, जिससे समीपवर्ती क्षेत्रों में दहशत का माहौल था। लोगों ने तेंदुए के भय के चलते घरों से निकलना बंद कर दिया था। तेंदुआ पकड़े जाने की खबर मिली, तो मौके पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। वन्यजीव विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे और कुत्ते का सहारा लिया था। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। वाइल्डलाइफ के अधिकारियों ने बताया कि जंगलों में कई अन्य स्थानों पर भी तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग ने पिंजरे लगाए हैं।