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जम्मू संभाग में मोदी लहर के आगे काम नहीं आई विपक्षी एकता, बीजेपी ने दो सीटों पर दर्ज की जीत
Thu, 23 May 2019 10:35 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 23 May 2019 10:35 PM IST
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जीत के बाद जश्न मनाते जुगल किशोर
- फोटो : संजय गुप्ता
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जम्मू संभाग की दोनों लोकसभा सीटों जम्मू-पुंछ और उधमपुर कठुआ डोडा संसदीय क्षेत्र में मोदी की प्रचंड लहर के आगे चुनाव नतीजों में विपक्षी एकता हवा-हवाई साबित हुई और दोनों सीटों पर भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान कभी भी नहीं लगा कि भाजपा को किसी विपक्षी उम्मीदवार से टक्कर मिल रही है।
जम्मू बीजेपी कार्यालय पर जीत का जश्न मनाते कार्यकर्ता
- फोटो : संजय गुप्ता
2014 में उधमपुर कठुआ डोडा संसदीय क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को करीब साठ हजार वोटों के अंतर से हराया था। जबकि इस बार डा. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस व नेकां के गठबंधन उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को तीन लाख से ज्यादा मतों से हरा रिकार्ड स्थापित किया।
जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं संग जश्न मनाते जुगल किशोर
- फोटो : संजय गुप्ता
जितेंद्र सिंह को करीब 683809 वोट हासिल हुए जबकि विक्रमादित्य सिंह को 356504 वोट ही हासिल हुए। जम्मू पुंछ लोकसभा क्षेत्र में भी 2014 की शानदार जीत की कहानी को एक बार फिर भाजपा ने दोहराया। भाजपा उम्मीदवार जुगल किशोर शर्मा ने कांग्रेस नेकां गठबंधन के उम्मीदवार रमण भल्ला को करीब 2.83 लाख वोटों के अंतर से हराया।
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जीत के बाद जश्न मनाते जुगल किशोर
- फोटो : संजय गुप्ता
जुगल को 715188 वोट हासिल हुए जबकि रमण भल्ला को 456043 वोट ही हासिल हो पाए। पीडीपी ने जम्मू संभाग की दोनों सीटों पर उम्मीदवार ही खड़े नहीं किए थे ताकि भाजपा को जीत से रोका जा सकें लेकिन विपक्षी एकता का चक्रव्यूह तोड़ मोदी लहर पर सवार भाजपा ने शानदार जीत कर इतिहास बना लिया।
मोदी लहर इतनी हावी रही कि भाजपा के पूर्व मंत्री एवं विधायक रहे चौधरी लाल सिंह ने पार्टी से अलग होकर जम्मू पुंछ व उधमपुर दोनों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह वह अपनी जमानत राशि तक नहीं बचा पाएं।
मोदी लहर इतनी हावी रही कि भाजपा के पूर्व मंत्री एवं विधायक रहे चौधरी लाल सिंह ने पार्टी से अलग होकर जम्मू पुंछ व उधमपुर दोनों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह वह अपनी जमानत राशि तक नहीं बचा पाएं।
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जीत का जश्न मनाते जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष और कार्यकर्ता
- फोटो : संजय गुप्ता
यहां न हारने वाले की चर्चा, न जीतने वाले की
बेशक जुगल किशोर भाजपा से दूसरी बार जीत कर सांसद बने हों, लेकिन उनसे अधिक चर्चा मोदी की हुई। यहां तक रुझानों में जब जुगल किशोर आगे चल रहे थे तो हर तरफ से यही आवाज आ रही थी कि मोदी आगे चल रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा और जुगल किशोर से अधिक पहचान मोदी की वजह से है।
नहीं पहुंचे रमन भल्ला
कांग्रेस के रमन भल्ला को शायद इस बात का अहसास हो गया था कि वह हार जाएंगे। शायद यही वजह है कि वह मतगणना केंद्र तक पहुंचे ही नहीं। जुगल किशोर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे, इसलिए वह सुबह ही पहुंच गए। रमन भल्ला के समर्थक और एजेंट तक दोपहर होते होते वहां से फुर्र हो गए। लेकिन कई ऐसे बचे जो भाजपा की जीत में शरीक हुए। उन्होंने भाजपा के एजेंटों को मुबारकबाद तक दी।
निर्दलीय मतगणना शुरू होते ही गायब
सुबह मतगणना होते ही पहले रमन भल्ला आगे चल रहे थे। इसके बाद जब भाजपा के जुगल किशोर आगे निकले तो बस निकलते ही गए। दोपहर 11 बजे तक बाकी के उम्मीदवारों के एजेंट जरूर दिखे, लेकिन इसके बाद यह गायब हो गए। हां,कुछ एजेंट जरूर रुक गए, मतगणना का मजा उठाने के लिए मौजूद रहे।
बेशक जुगल किशोर भाजपा से दूसरी बार जीत कर सांसद बने हों, लेकिन उनसे अधिक चर्चा मोदी की हुई। यहां तक रुझानों में जब जुगल किशोर आगे चल रहे थे तो हर तरफ से यही आवाज आ रही थी कि मोदी आगे चल रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा और जुगल किशोर से अधिक पहचान मोदी की वजह से है।
नहीं पहुंचे रमन भल्ला
कांग्रेस के रमन भल्ला को शायद इस बात का अहसास हो गया था कि वह हार जाएंगे। शायद यही वजह है कि वह मतगणना केंद्र तक पहुंचे ही नहीं। जुगल किशोर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे, इसलिए वह सुबह ही पहुंच गए। रमन भल्ला के समर्थक और एजेंट तक दोपहर होते होते वहां से फुर्र हो गए। लेकिन कई ऐसे बचे जो भाजपा की जीत में शरीक हुए। उन्होंने भाजपा के एजेंटों को मुबारकबाद तक दी।
निर्दलीय मतगणना शुरू होते ही गायब
सुबह मतगणना होते ही पहले रमन भल्ला आगे चल रहे थे। इसके बाद जब भाजपा के जुगल किशोर आगे निकले तो बस निकलते ही गए। दोपहर 11 बजे तक बाकी के उम्मीदवारों के एजेंट जरूर दिखे, लेकिन इसके बाद यह गायब हो गए। हां,कुछ एजेंट जरूर रुक गए, मतगणना का मजा उठाने के लिए मौजूद रहे।