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साहब, हम मजदूर हैं...नसीब में धक्के खाना ही लिखा है, जो पैसा लाए थे वो भी खत्म हो गया

Fri, 15 May 2020 02:29 PM IST
प्रशांत कुमार ध्वज द्विवेदी, जम्मू
ध्वज द्विवेदी, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 15 May 2020 02:29 PM IST
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lockdown in Jammu Kashmir (J&K) news in Hindi, agony of worker who trapped in lockdown
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन होने के बाद से ही कई राज्यों में प्रवासी श्रमिक फंसे हुए हैं। इस दौरान सभी प्रकार के काम-धंधे ठप होने के कारण श्रमिकों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ज्यादातर मजदूर अपने घर जाना चाहते हैं, लेकिन समस्या यह है कि यात्री परिवहन सेवाएं बंद होने के कारण इन मजदूरों के पास घर जाने का कोई साधन नहीं है।

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हालांकि, केंद्र सरकार ने बाहरी राज्यों में फंसे श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिए विशेष श्रमिक ट्रेनें चलाई हैं। लेकिन इन ट्रेनों का फायदा मजदूरों को मिलता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि ज्यादातर श्रमिकों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।
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समय : रात 1:30 बजे
स्थान : तवी पुल

यहां 15-20 प्रवासी श्रमिक पैदल ही लखनपुर तक जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन नाके पर तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया और वापस घर जाने के निर्देश दिए। श्रमिकों के इस समूह में शामिल मंगल ने बताया कि वे सभी उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले हैं और करीब ढाई महीने पहले जम्मू मजदूरी की तलाश में आए थे। बताया कि यहां आने के कुछ दिन बाद ही कोरोना वायरस का प्रकोप फैलने लगा जिसकी वजह से लॉकडाउन हो गया और वे सभी लोग यहां फंस गए।
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मंगल ने कहा ‘मजदूर हैं साहब, हमारे नसीब में धक्के खाना ही लिखा है

सभी श्रमिक एक दूसरे के रिश्तेदार हैं और जम्मू आने के बाद पलोड़ा में रह रहे थे। मंगल ने कहा कि जो पैसा वे अपने साथ लाए थे वह खत्म हो चुका है। किसी की तरफ से कोई सहायता प्रदान नहीं की जा रही है। अब काम भी नहीं है, तो पैसे कमाने की आस भी खत्म हो चुकी है।

किसी ने बताया था कि अगर लखनपुर तक पहुंच जाएं तो वहां से घर जाने का साधन मिल सकता है, इसीलिए रात को पैदल ही लखनपुर जाने की कोशिश कर रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि सरकार ट्रेन तो चला रही है, लेकिन इसका किराया इतना ज्यादा है कि वे टिकट खरीदने में असमर्थ हैं। उनके पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं है। उन्हें नहीं पता कि आगे क्या होगा, वे अपने घर पहुंच भी पाएंगे या नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि कोशिश जारी रखेंगे। मंगल ने कहा ‘मजदूर हैं साहब, हमारे नसीब में धक्के खाना ही लिखा है।’

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