{"_id":"60a3a01f2ffa4a231606709b","slug":"know-how-corona-hit-jammu-and-kashmir-tourism-who-suffered-how-much","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: पर्यटन पर पड़ी कोरोना की मार, जानिए किसे कितना हुआ नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: पर्यटन पर पड़ी कोरोना की मार, जानिए किसे कितना हुआ नुकसान
Tue, 18 May 2021 05:04 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 18 May 2021 05:04 PM IST
सार
हर साल पीक सीजन में आता है दस हजार करोड़, प्रदेश की जीडीपी का दस फीसदी पर्यटन उद्योग से।
विज्ञापन
jammu kashmir tourism
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना महामारी ने लगातार दूसरे साल जम्मू के पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी है। पीक सीजन से होने वाली करोड़ों की कमाई पर फिर लॉकडाउन का ग्रहण लग गया है। पर्यटन से जुड़े होटलों, ट्रेवल एजेंसियों, टूरिस्ट वाहनों और प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े हथकरघा, ड्राई फ्रूट आदि व्यवसायों को इस साल कोविड से दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। बीते वर्ष पर्यटन उद्योग को 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस साल आलम ये है कि जम्मू के एक हजार होटलों, ट्रेवल एजेंसियों और पांच हजार टूरिस्ट वाहनों के पास पिछले दो महीने से और अगले दो महीनों के लिए कोई बुकिंग नहीं है।अमरनाथ यात्रा के होने की संभावना भी कम है। लिहाजा इस नुकसान को देखते हुए पर्यटन उद्यमियों ने सरकार से विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है। जम्मू संभाग के एक हजार होटलों, ट्रेवल एजेंसियों और पांच हजार टूरिस्ट वाहनों के पास कोई बुकिंग नहीं है।
kashmir tourism
- फोटो : .File Photo
वित्तीय पैकेज के अलावा कोई हल नहीं
एक हजार होटलों में शून्य बुकिंग है। इतनी ही ट्रेवल एजेंसियां हैं जिनके पास भी कोई बुकिंग नहीं है। अप्रैल से जुलाई तक पीक सीजन होता है। पिछले साल भी कोविड से कमाई न के बराबर थी। इस साल भी उम्मीद नहीं है। अगर अगले महीने भी लॉकडाउन हट जाए तो इसकी भरपाई नहीं होगी। क्योंकि लोग खुद ही अपने घरों से बाहर नहीं आना चाहते। सरकार पर्यटन से जुड़े व्यवसायों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करे।-राजेश गुप्ता, चेयरमैन, टूरिज्म फेडरेशन, जम्मू
एक हजार होटलों में शून्य बुकिंग है। इतनी ही ट्रेवल एजेंसियां हैं जिनके पास भी कोई बुकिंग नहीं है। अप्रैल से जुलाई तक पीक सीजन होता है। पिछले साल भी कोविड से कमाई न के बराबर थी। इस साल भी उम्मीद नहीं है। अगर अगले महीने भी लॉकडाउन हट जाए तो इसकी भरपाई नहीं होगी। क्योंकि लोग खुद ही अपने घरों से बाहर नहीं आना चाहते। सरकार पर्यटन से जुड़े व्यवसायों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करे।-राजेश गुप्ता, चेयरमैन, टूरिज्म फेडरेशन, जम्मू
Kashmir Tourism
- फोटो : file photo
किस्तें निकालना भी मुश्किल
जम्मू संभाग में पांच हजार टूरिस्ट वाहन हैं, जो जम्मू से पूरे प्रदेश और देश के लिए चलते हैं। हर एक वाहन पीक सीजन में तीन लाख रुपये कमाता है। इस हिसाब से 1500 करोड़ रुपये सिर्फ टूरिस्ट वाहन ही कमाते हैं। लेकिन पिछले साल भी काम नहीं चला। इस साल हालात चिंताजनक हैं। वाहन पार्किंग स्थलों में खड़े हैं। पार्किंग फीसद भी देनी पड़ रही है। सरकार हर महीने टूरिस्ट वाहन चालकों को आर्थिक मदद दे। नए वाहनों की किस्तें निकालना भी मुश्किल हो गया है। - अंचल सिंह मन्हास, टूरिस्ट आपरेटर टैक्सी एसोसिएशन, जम्मू
जम्मू संभाग में पांच हजार टूरिस्ट वाहन हैं, जो जम्मू से पूरे प्रदेश और देश के लिए चलते हैं। हर एक वाहन पीक सीजन में तीन लाख रुपये कमाता है। इस हिसाब से 1500 करोड़ रुपये सिर्फ टूरिस्ट वाहन ही कमाते हैं। लेकिन पिछले साल भी काम नहीं चला। इस साल हालात चिंताजनक हैं। वाहन पार्किंग स्थलों में खड़े हैं। पार्किंग फीसद भी देनी पड़ रही है। सरकार हर महीने टूरिस्ट वाहन चालकों को आर्थिक मदद दे। नए वाहनों की किस्तें निकालना भी मुश्किल हो गया है। - अंचल सिंह मन्हास, टूरिस्ट आपरेटर टैक्सी एसोसिएशन, जम्मू
विज्ञापन
विज्ञापन
kashmir tourist
- फोटो : बासित जरगर
पीक सीजन में सालाना किसको कितना नुकसान
-एक हजार होटल: पांच हजार करोड़
-एक हजार ट्रेवल एजेंसी: एक हजार करोड़
-टूरिस्ट वाहन: 1500 करोड़
-हथकरघा, ड्राईफ्रूट, फल आदि: 2500 करोड़
-एक हजार होटल: पांच हजार करोड़
-एक हजार ट्रेवल एजेंसी: एक हजार करोड़
-टूरिस्ट वाहन: 1500 करोड़
-हथकरघा, ड्राईफ्रूट, फल आदि: 2500 करोड़
विज्ञापन
कश्मीर में विदेशी पर्यटक
- फोटो : फाइल फोटो
सब कुछ सरकार के संज्ञान में, अभी कुछ कहना जल्दबाजी
पिछले साल भी पर्यटन उद्योग को लेकर एक कमेटी बनी थी। जिसने सभी पर्यटन से जुड़े लोगों से बात की थी। कुछ पैकेज दिया भी गया। इस समय भी सरकार के यह संज्ञान में है। सरकार इस पर कुछ न कुछ जरूर सोचेगी। फिलहाल अभी इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। - सरमद हफीज, आयुक्त सचिव, पर्यटन विभाग, जम्मू-कश्मीर
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों का आंकड़ा घटा, मौतों की संख्या बढ़ी
पिछले साल भी पर्यटन उद्योग को लेकर एक कमेटी बनी थी। जिसने सभी पर्यटन से जुड़े लोगों से बात की थी। कुछ पैकेज दिया भी गया। इस समय भी सरकार के यह संज्ञान में है। सरकार इस पर कुछ न कुछ जरूर सोचेगी। फिलहाल अभी इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। - सरमद हफीज, आयुक्त सचिव, पर्यटन विभाग, जम्मू-कश्मीर
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों का आंकड़ा घटा, मौतों की संख्या बढ़ी