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कारगिल युद्ध: वो तीन चोटियां और युद्ध के तीन महीने, जानिए कैसे पाक के साथ-साथ मौसम भी था दुश्मन

Fri, 26 Jul 2019 03:15 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Fri, 26 Jul 2019 03:15 AM IST
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kargil vijay diwas: kargil war, Battle of Tololing, point 5140 and tiger hill war story of mountains
कारगिल युद्ध - फोटो : फाइल, अमर उजाला
दुर्गम चोटियों पर दुश्मन से लोहा लेते हुए जो चुनौतियां सामने आईं, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। एक तरफ तीनों चोटियों पर बैठी पाकिस्तानी सेना, दूसरी तरफ नीचे बुलंद हौसला लिए भारत माता के जांबाज सपूत। 


करीब तीन महीने के इस युद्ध मेें दुश्मन ऊपर से एक-एक हरकत देख वार कर रहा था, तो भारतीय सेना हर हाल में उन्हें धूल चटा उन्हें उनकी औकात पर आमादा थी। सबसे ज्यादा बहादुरी के अवार्ड भी फौजियों को इसी लड़ाई में मिले। 

पूर्व सैनिक सेवा परिषद के उधमपुर जिला के अध्यक्ष मेजर उमा कांत शर्मा कारगिल युद्ध से जुड़ी याद ताजा करते हुए कहते हैं कि यह उन दिनों की बात है, जब मैं अखनूर में आर्मी के हेडक्वार्टर मेें तैनात था। आर्मी की ट्रांसपोर्ट बटालियनें डिस्बैंड की जा रही थीं। 

हेडक्वार्टर मेें हमने अपने मुख्य अधिकारियों के सहयोग से राजोरी, नौशेरा से इस एक माउंटेन आर्टिलरी बटालियन को डिस्बैंड होने से रुकवाया था, जो कारगिल के युद्ध में काकसर और अन्य दुर्गम पहाड़ियों में सेना के तोपखाने को ले जाने में बहुत ही मददगार साबित हुए। 
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मेजर उमा कांत शर्मा के अनुसार सबसे भयंकर सामना दुश्मन से द्रास सेक्टर के तोलोलिंग की पहाड़ियों, प्वाइंट 5140 और टाइगर हिल पर हुआ। यह रक्षा के मुताबिक अति महत्वपूर्ण थे। यहां पर दुश्मन हमारा लेह का रास्ता रोके हुए काफी नुकसान पहुंचा रहा था। वहीं श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को चालू रखना आर्मी की पहली जरूरत थी। द्रास के सामने वाली तीनों पहाडि़यों पर पाकिस्तान की बड़ी संख्या में फौज थी। 

तोलोलिंग और टाइगर हिल पर मिली चुनौति के शुरू से आखिर तक के गवाह रहे रिटायर्ड आनररी कैप्टन तारा सिंह जम्वाल तब 18 ग्रेनेडियर रजिमेंट द्रास सेक्टर में हवलदार थे। वह कहते हैं कि हम मीनामार्ग थे, जहां पर हमें तोलोलिंग की सभी लगभग एक दर्जन पहाड़ियों पर दुबारा कब्जा करने का काम सौंपा गया। 

लैफ्टिनेंट कर्नल विश्वानाथन (कमांडर) के नेतृत्व में हमें आगे बढ़ने का आदेश मिला। 28 मई 1999 को दुश्मन पर हमने जोरदार धावा बोला और रात के समय दो चौकियों पर तोलोलिंग के नीचे कब्जा जमा लिया। यह हमारी पहली जीत थी। इस दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन, एक जेसीओ और पांच अन्य जवान शहीद हुए। 

तोलोलिंग की दूसरी पहाड़ियों पर कब्जा करने के लिए हमेें 13जेएंडके राइफल्स और 2 राजपुताना राइफल्स की मदद पहुंच चुकी थी। पूरी तैयारी के साथ 15 जून की रात हमला बोला गया। इसमें तोप की मदद भी ली। इसके साथ ही हमने तीन और महत्वपूर्ण चौकियों पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 15 सैनिक और एक अफसर हमारे कंपनी कमांडर मेजर राजेश सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। 
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कारगिल युद्ध - फोटो : फाइल, अमर उजाला
16 जून को हम द्रास आ गए। अगला हमला सबसे ऊंची पहाड़ी पर बोलना था। सीओ कर्नल कौशल ठाकुर साथ थे। 30 जून को हमारी रजिमेंट 18 ग्रेनेडियर टाइगर हिल के लिए रवाना हुई। 8 सिख रेजिमेंट पीछे बेस कैंप में मदद के लिए तैनात थी। इस दौरान हमें तोप के अलावा एयर सपोर्ट भी लेनी पड़ी। 

सात जुलाई को दुश्मन के दांत खट्टे करते हुए रात के चार बजे टाइगर हिल पर विजय पाने में सफल हुए। इस दौरान सात जवानों को और शहादत देनी पड़ी। बहादुरी के लिए ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को परमवीर चक्र से नवाजा गया, जबकि लेफ्टिनेंट बलवंत सिंह को महावीर चक्र प्रदान किया गया। 
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कारगिल जंग के बाद भारतीय सेना के जवान - फोटो : फाइल, अमर उजाला
भारत पाकिस्तान के बीच छिड़े कारगिल युद्ध से एलओसी के दोनों तरफ की आबादी पर व्यापक असर पड़ा था। रेडक्रॉस सोसाइटी के अनुसार भारतीय क्षेत्र में 20 हजार लोगों पर युद्ध का असर पड़ा जबकि पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में 30 हजार लोग युद्ध से प्रभावित हुए।

कारगिल युद्ध के दौरान घुसपैठियों की लोकेशन पता करना टेढ़ी खीर बना रहा। भारत ने अमेरिका से ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) मांगा था ताकि दुश्मन की पोजीशन का पता लगाया जा सके। लेकिन अमेरिका ने जीपीएस देने से इनकार कर दिया। सत्रह साल बाद अप्रैल 2016 में भारत ने नाविक नाम से रीजनल पोजीशनिंग सिस्टम तैयार करने में कामयाबी हासिल की।
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कारगिल विजय दिवस

परमवीर चक्र विजेता

कैप्टन विक्रम बत्रा, 13 जैक राइफल्स
लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, 1/11 गोरखा राइफल्स
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, 18 ग्रेनेडियर्स
राइफलमैन संजय कुमार, 13 जैक राइफल्स
 

महावीर चक्र विजेता

मेजर विवेक गुप्ता, 2 राजपुताना राइफल्स
मेजर पदमापानी आचार्य, 2 राजपुताना राइफल्स
कैप्टन एन केंगुरुसे, 2 राजपुताना राइफल्स
नायक दिगेंद्र कुमार, 2 राजपुताना राइफल्स
मेजर राजेश सिंह अधिकारी, 18 ग्रेनेडियर्स
लेफ्टिनेंट बलवान सिंह, 18 ग्रेनेडियर्स
कैप्टन अनुज नायर, 17 जाट
लेफ्टिनेंट केशिंग क्लिफोर्ड नाेंग्रुम, 12 जैक लाइट इंफेंट्री
मेजर सोनम वांगचुक, लदाख स्काउट्स
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