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कारगिल गाथाः गुड़-चने खाकर दो दिन पहाड़ चढ़े भारतीय सेना के जाबांज, फिर कब्जा लीं दो पाकिस्तानी पोस्ट

Sat, 25 Jul 2020 10:39 PM IST
Vikas Kumar अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 25 Jul 2020 10:39 PM IST
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Kargil Day: Indian army climbing mountain for two day and captured two Pakistani posts
कारगिल विजय दिवस - फोटो : सोशल मीडिया

कारगिल के दुर्गम पहाड़ों पर असाधारण पराक्रम दिखाने वाले जांबाजों की कहानियां आज भी जोश भरती हैं। रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई पर बैठे दुश्मन को भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने पहले चौंकाया और फिर मार भगाया। सेना की टुकड़ियां ऊपर चढ़तीं तो ऊपर से पाकिस्तानी घुसपैठिए पत्थर और गोलियां बरसाते थे। मोर्टार और तोप के गोले भी दागते।  


 

Kargil Day: Indian army climbing mountain for two day and captured two Pakistani posts
कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला

ऑनरेरी सूबेदार मेजर (रि) स्वर्ण दास कहते हैं कि उनकी पलटन 12 जैकलाई को बटालिक सेक्टर की पहाड़ी नंबर 5203 पर कब्जा करने का आदेश मिला। दो अफसरों और 30 से 32 सैनिकों की टुकड़ी को पहाड़ी पर जाना था। 17 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित टारगेट को हासिल करने के लिए रणनीति से काम लिया। 8 जून 1999 को पहाड़ी की तरफ कूच किया गया। कंधों पर हथियार और असलहा लिए आगे बढ़ते तो दुश्मन पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर गिराते। गोलियां बरसाते। हम गुड़ और चने खाकर चढ़ाई करते। दो दिन तक ऐसे ही हालात में लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे। 

Kargil Day: Indian army climbing mountain for two day and captured two Pakistani posts
कारगिल

10 जून को पहाड़ी पर पहुंचने तक दो अफसरों समेत 7 से 8 जवान शहीद हो चुके थे। मुझे भी एक गोली लग गई। कई अन्य जवान भी घायल हो गए। फिर भी हमें रुके नहीं। पाकिस्तानी पोस्ट में पहुंचने तक दुश्मन के आठ सैनिक ढेर कर चुके थे। बाकी घुसपैठिए भाग चुके थे।’ 10 जून की सुबह आखिरकार 5203 चोटी को कब्जा लिया गया। 2 जुलाई को 4812 पहाड़ी पर भी हमारा कब्जा हो गया। 

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Kargil Day: Indian army climbing mountain for two day and captured two Pakistani posts
कारगिल - फोटो : ANI

पांच गोलियां लगने के बावजूद आठ किमी चलकर नीचे पहुंचे 
हम एक ग्लेश्यिर में थे। इसके बाद हमें दिल्ली भेजा गया। वहां से मैं छुट्टी पर घर आया था। इसी बीच हमें वापस बुलाया गया। जून के महीने में ही हमें बटालिक सेक्टर में भेजा गया। यहां हमें पहाड़ी नंबर 5203 पर कब्जा करना था। हम ऊपर चढ़ाई कर रहे थे। जैसे ही पहाड़ी पर पहुंचे तो वहां कुछ घुसपैठिये घात लगाकर बैठे थे। हम सर्च कर रहे थे, तभी दो ने पकड़ लिया। उनसे हाथापाई हुई। लेकिन हमने उन्हें तेजधार हथियार से मार गिराया। पोस्ट कब्जे में आ गई थी। लेकिन पांच गोलियां लग चुकी थीं। इसके बावजूद आठ किलोमीटर तक नीचे पैदल चलकर पहुंचे। इसके बाद बेहोश हो गया। कुछ दिन बाद होश आया तो पता चला कि उधमपुर के सैन्य अस्पताल में हूं। कारगिल युद्ध का वह दृश्य आज भी जोश से भर जाता है। 
- राइफलमैन संसार सिंह, 12 जैकलाई

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