जम्मू-कश्मीर: हेरोइन का बढ़ा चलन, युवतियां भी आ रही गिरफ्त में
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केंद्र में प्रतिदिन 1-2 नए नशे के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। अब तक ओएसटी केंद्र पर 845 पीड़ित पंजीकृत हो चुके हैं और यह आंकड़ा तेजी से ऊपर जा रहा है। यह सिर्फ जम्मू जिले का आंकड़ा है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में ऐसे नशे के मामलों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। केंद्र में पीड़ित को डॉक्टर के सामने बीमारी के हिसाब से रोजाना ब्यूपरीनारफीन टैबलेट की डोज दी जाती है। यह दवा 18 वर्ष से ऊपर वाले पीड़ितों को ही दी जा सकती है, जबकि इससे कम आयु के नशे के पीड़ितों को बाजार से दूसरी दवाई दी जाती है। केंद्र पर मौजूदा पीड़ितों को दवाई मुहैया करवाई जा रही है। केंद्र की प्रभारी डॉ. चारू बाली के अनुसार ओपीडी में प्रतिदिन 300-350 मरीज पहुंचते हैं, जिसमें अधिकतर हेरोइन के मामले होते हैं।
सामूहिक इंजेक्शन से हैपेटाइटिस, एचआईवी का खतरा बढ़ा
युवाओं में इंजेक्शन के माध्यम से सामूहिक तौर पर हेरोइन का नशा लेने से उनमें हैपेटाइटिस बी, सी, एचआईवी सहित अन्य संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ा है। हाल ही में जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग की ओर से चलाए गए एक अभियान में सामने आया था कि ऐसे सामूहिक नशे में कई युवा संक्रमित बीमारियों का सिशकार हुए हैं।
धीरे धीरे बढ़ाई जाती है डोज
हेरोइन के नशे की लत को पूरा करने के लिए पानी के साथ ड्रग्स मिलाकर इंजेक्शन से शरीर में डाल दिया जाता है। इस महंगे नशे के शौक में पहले यह ड्रग्स रोजाना 3-4 हजार रुपये में ली जाती है, लेकिन धीरे धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमती मोटी होती जाती है। इस ड्रग्स से पीड़ित के फेफड़ों में इंफेक्शन रहती है।
- डोज न लेने पर शरीर में जबरदस्त दर्द होना
- शरीर का टूटना, काम करने की हिम्मत न होना
- नाक और मुंह से नियमित पानी चलना
- कमजोरी महसूस करना