जम्मू-पुंछ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वीडियो कोच बस चला रहा ड्राइवर मोबाइल पर बात कर रहा था। रफ्तार भी ज्यादा थी। उसे टोका भी गया लेकिन वह नहीं माना। बस की रफ्तार ने कई सवारियों को पहले ही डरा दिया था। घायलों के मुताबिक रास्ते में जब ड्राइवर को रफ्तार कम करने को कहा गया तो वह नहीं माना। कई सवारियों ने डर के मारे नौशेरा पुल पर किराया वापस लिया और बीच रास्ते उतर दूसरी बस पकड़ ली। इसके कुछ ही देर बाद बस गहरी खाई में जा गिरी। बस कई पलटे खाती हुई नीचे गिरी और बीच में मौजूद सवारियों की चीख-पुकार मची हुई थी। उपजिला अस्पताल सुंदरबनी में उपचाराधीन घायलों ने मौत को करीब से देखने की आपबीती सुनाई।
जम्मू-कश्मीर सड़क हादसाः 10 की गई जान और 36 घायल, चर्चा में पेड़ से लटका एक बच्चा
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उन्होंने बताया कि सुरनकोट से चलने के बाद से ही बस चालक तेज रफ्तार से बस चला रहा था। रास्ते में कई बार दूसरे वाहनों को ओवरटेक किया। दो तीन बार तो हादसा होते-होते बचा था। इसके बाद चालक ने ड्राइविंग करते हुए मोबाइल पर बात करनी शुरू कर दी लेकिन रफ्तार नहीं घटाई। यात्रियों ने उसे गाड़ी धीमी चलाने और मोबाइल पर बात करने से मना किया था लेकिन वह नहीं माना।
उधर, बस के खाई में गिरने पर आसपास के लोग जमा हो गए। फौरन सभी खाई में उतरते गए। नीचे उतरे तो बस के परखच्चे उड़ चुके थे। कुछ शव झटका लगने से बाहर आ गिरे थे, बाकी के अंदर फंसे हुए थे। एक यात्री का तो सिर ही धड़ से अलग हो गया। लोगों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया। घायलों को संभाला। पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। रेस्क्यू ऑपरेशन में जैसे लोगों का सैलाब ही उमड़ पड़ा। यह बातें घटनास्थल पर दर्दनाक मंजर देखने के बाद लोगों ने बयान की।
नौशेरा के लंबेड़ी के पास हुए हादसे का बड़ा कारण ओवरलोडिंग और रैश ड्राइविंग बताई जा रही है। पता चला है कि वीडियो कोच बस 42 सीटर थी लेकिन उसमें 60 से 65 यात्री भर रखे थे। गनीमत रही कि कुछ यात्री हादसे से पहले डंडेसर और लंबेड़ी में ही उतर गए थे। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस की रफ्तार काफी तेज थी। तीखे मोड़ पर ड्राइवर काबू नहीं रख पाया और बस बेकाबू होकर खाई में जा गिरी।
हादसे के दौरान एक वाक्या पेश आया जो किसी करिश्मे से कम नहीं है। बस जब खाई में गिरी तो उसमें तीन माह का बच्चा भी था। पलटियां खाने के दौरान वह बस से निकलकर पेड़ पर अटक गया। हैरानी इस बात की है कि बच्चे को खरोंच तक नहीं आई। गनीमत ये रही कि हादसे में बच्चे की मां भी बच गई। हालांकि वह भी जख्मी है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। बच्चे को उसके हवाले कर दिया गया। इस बात की चर्चा पूरे इलाके में है। लोगों की जुबां पर सिर्फ यही बात है कि जाको राखे साइयां मार सके न कोई। हादसे में कुछ लोगों को मामूली चोटें पहुंची हैं जो पैदल ही सड़क मार्ग तक पहुंचे।