दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में तैनात सैनिकों को अब और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। अमूमन यहां तैनात सैनिकों को कोल्ड इंज्युरी का सामना करना पड़ता है। साथ ही बर्फीले तूफान तथा हिमस्खलन से कई बार आपात स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। अब इन चुनौतियों से निपटने के लिए सेना ने सियाचिन के 403 फील्ड अस्पताल में क्राइसिस एक्सपेंशन वार्ड की स्थापना की है। यहां ऑक्सीजन थिरैपी तथा डिजिटल रेडियोग्राफी की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। माइनस शून्य से भी कम तापमान में तैनात सैनिकों को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सांस में तकलीफ के साथ ही दिमागी सूनापन की भी दिक्कतें आती हैं। कोल्ड इंज्युरी तो सामान्य है। इन बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच तथा चिकित्सा सुविधाएं मिलना जरूरी है। ऐसे में अस्पताल में ऑक्सीजन थिरैपी तथा डिजिटल रेडियोग्राफी सेंटर की स्थापना की गई है।
जम्मू-कश्मीर: सियाचिन में अब सैनिकों को बर्फीले तूफान, हिमस्खलन में मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
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इस सेंटर के शुरू हो जाने से सैनिकों को सांस संबंधी दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा। साथ ही समय पर उनकी जांच भी कराई जा सकेगी जिससे बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा। अस्पताल में क्राइसिस वार्ड की क्षमता भी बढ़ाई गई है। इसके कई प्रकार की आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में सहायता मिलेगी। यह न केवल सैनिकों को बल्कि स्थानीय लोगों को भी बेहतर चिकित्सा प्रदान कर सकेगा।
सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि वार्ड की स्थापना का काम वर्ष 2020 में शुुरू किया गया था। काम पूरा होने के बाद वीरवार को 102 इंफैंट ब्रिगेड के ब्रिगेडियर पद्म देव ठाकुर ने किया। इस दौरान 403 फील्ड अस्पताल के सीओ कर्नल सौरभ भारद्वाज व लेफ्टिनेंट कर्नल ध्रुव माथुर भी मौजूद थे। इसके साथ ही ऑक्सीजन थिरैपी सेंटर का शुभारंभ ब्रिगेडियर (मानद) डा. अरविंद लाल ने किया।
1984 से लगातार डटे हुए हैं सैनिक
सियाचिन ग्लेशियर भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास लगभग 78 किमी में फैला है। इसके एक तरफ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन की सीमा अक्साई चीन है। सामरिक दृष्टि से इस ग्लेशियर का काफी महत्व है। 1984 से पहले इस जगह पर न तो भारत और न ही पाकिस्तान की सेना की उपस्थिति थी।
1972 के शिमला समझौते में सियाचिन इलाके को बेजान और बंजर करार दिया गया था, लेकिन इस समझौते में दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण नहीं हुआ था। वर्ष 1984 में खुफिया जानकारी मिली कि पाकिस्तान सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद 13 अप्रैल 1984 को भारत ने अपनी सेना तैनात कर दी। यहां पर कब्जे के लिए सेना ने ऑपरेशन मेघदूत चलाया था।
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