जम्मू-कश्मीर में कोरोना से जंग के दौरान डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों ने बेहतरीन मिसाल पेश की। ऐसे दर्जनों डॉक्टर-स्वास्थ्य कर्मी थे, जो खुद संक्रमित होने के बाद भी अपने फर्ज से पीछे नहीं हटे। कोरोना को मात देकर फिर मैदान में उतरे। कई कोरोना वारियर्स ने इस लड़ाई में अपने जीवन का बलिदान दे दिया। जीएमसी जम्मू में डॉ. दारा सिंह, डॉ. अमनदीप कौर आनंद, डॉ. रेणू शर्मा और श्रीनगर में डॉ. नवीद करीब दो माह तक घर ही नहीं गए। दिन-रात अस्पताल में सेवा के साथ वहीं गेस्ट हाउस में रहे। ऐसे कोरोना वॉरियर्स के कारण कई लोगों की जान बच सकी। आइए जानें, उन कोरोना वारियर्स के बारे में जिन्होंने महामारी के खिलाफ बड़ी चुनौतियों का सामना किया।
जम्मू-कश्मीर कोरोना वारियर्स : न डरे न हारे...परिवार से दूर महीनों अस्पताल को ही बना लिया घर
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परिवार से दूर सात माह गेस्ट हाउस में बिताए
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जीएमसी जम्मू के अधीक्षक डॉ. दारा सिंह ने परिवार से दूर सात माह से अधिक समय घर से बाहर गेस्ट हाउस में बिताया। इस दौरान अपनों की याद तो आई, लेकिन कोरोना मरीजों की चिकित्सा देखभाल को प्राथमिकता देना जरूरी था। डॉ. दारा सिंह ने बताया कि पिछले साल मार्च में जम्मू में पहला कोविड मामला आने के बाद पाबंदियां भी लागू हो गई थीं। अप्रैल से उन्होंने गेस्ट हाउस को अपना घर बना लिया और वहीं से सीधे मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल आते-जाते थे।
घर से अकेले बाहर रहने में कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन अस्पताल पहुंचने वाले कोरोना मरीजों को देखना भी जरूरी था। इस बीच 15 सितंबर 2020 को खुद संक्रमित हो गए। इसके बाद 15 दिन वह बेड पर रहे और अन्य 15 दिन उन्हें दोबारा बहाल होने में लगे। इसके बाद फिर वे मरीजों की सेवा में जुट गए। डॉ. सिंह कहते हैं कि कोविड की दूसरी लहर को देखते हुए सभी को पूरी एहतियात बरतने की जरूरत है। वैक्सीन लेने वालों को भी अभी सतर्क रहना होगा। कोविड प्रोटोकॉल का सभी गंभीरता से पालन करें।
संक्रमित होने पर भी लड़ाई जारी रखी
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. रेणु शर्मा ने कोविड संक्रमित होने के बावजूद महामारी के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। संभाग के दस जिलों की कोविड देखभाल की जिम्मेदारी संभाल रही डॉ. रेणु खुद 12 सितंबर 2020 को संक्रमित हो गई थीं। हालत खराब होने पर उन्हें नारायणा अस्पताल कटड़ा में सात दिन तक भर्ती रहना पड़ा। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वह फिर इस लड़ाई में उतर आईं और आज तक लगातार कोविड चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कोविड के बीच उन्हें कोविड वैक्सीन अभियान से जुड़ने का मौका मिला। उन्हें कई माह तक परिवार कल्याण विभाग के निदेशक पद के अतिरिक्त कार्यभार की भी जिम्मेदारी मिली। डॉ. रेणु का कहना है कि कोविड के खिलाफ सबको मिलकर लड़ना होगा। कोविड वैक्सीन लेने के लिए सभी को खुलकर आगे आना चाहिए। वैक्सीन से ही महामारी से निजात मिल सकती है। कोविड को लेकर पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
कोरोना काल के दौरान गांधीनगर अस्पताल में कार्यरत स्त्री विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कौर आनंद को भी परिवार से दूर दो माह होटल में रहना पड़ा। मरीजों की सेवा के लिए कई चुनौतियों का सामना किया। इस दौरान उनके पति डॉ. संदीप डोगरा भी दो माह होटल में रहे। डॉ. आनंद ने बताया कि घर से बाहर रहने पर बच्चों की देखभाल सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उस समय परिवार के अन्य सदस्यों ने साथ दिया और बच्चों को संभाला, जिससे हम मरीजों की उचित देखभाल करने के लिए तैयार हो सके।