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जम्मू-कश्मीर: बम-बम भोले के जयकारों से गूंजा भद्रवाह, पवित्र छड़ी यात्रा कैलाश कुंड के लिए रवाना

Sat, 04 Sep 2021 10:17 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 04 Sep 2021 10:17 PM IST
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Jammu-Kashmir: Bhaderwah reverberated with the cheers of Bham-bham, holy stick yatra left for Kailash Kund
कैलाश कुंड - फोटो : अमर उजाला
भद्रवाह से सीमित यात्रियों के साथ तीन दिवसीय पवित्र छड़ी यात्रा कैलाश कुंड के लिए रवाना हुई। शनिवार सुबह आठ बजे पवित्र छड़ी 2100 साल पुराने वासुकी नाग मंदिर गाठा से रवाना हुई। इसमें वासुकी नाग मंदिर वासिक डेरा भद्रवाह से एक और छड़ी को शामिल किया गया। इस मौके पर पहले वासिक ढेरा में हुए धार्मिक अनुष्ठानों में पूर्व एमएलसी और वासुकी नाग मंदिर वासिक डेरा के वजीर नरेश कुमार गुप्ता और वरिष्ठ नेता मस्त नाथ योगी मुख्य रूप से मौजूद रहे। यात्रा के रवाना होते समय पूरा क्षेत्र भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा है। इस प्राचीन तीर्थयात्रा में हर साल जम्मू-कश्मीर सहित अन्य प्रदेशों के भी हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। लेकिन दो वर्षों से कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने सीमित लोगों को ही पवित्र छड़ी यात्रा निकालने की अनुमति दी जा रही है। एडीसी भद्रवाह राकेश कुमार ने बताया कि पवित्र छड़ी यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
Jammu-Kashmir: Bhaderwah reverberated with the cheers of Bham-bham, holy stick yatra left for Kailash Kund
भद्रवाह - फोटो : Amar Ujala

शनिवार को भद्रवाह से रवाना हुई छड़ी सोमवार सुबह समुद्र तल से 14700 फुट की ऊंचाई पर स्थित झील पर पहुंचेगी। पूर्व एमएलसी और वासुकी नाग मंदिर वासिक डेरा के वजीर ने बताया कि वासुकी नाग समस्याओं का समाधान करेंगे।

Jammu-Kashmir: Bhaderwah reverberated with the cheers of Bham-bham, holy stick yatra left for Kailash Kund
भद्रवाह - फोटो : सोशल मीडिया

स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड शिव का मूल निवास था, लेकिन भगवान शिव ने इसे वासुकी नाग को दे दिया और स्वयं भरमौर (हिमाचल प्रदेश) के मणिमहेश में रहने चले गए। कैलाश यात्रा जो श्रावण पूर्णिमा के 14वें दिन शुरू होती है।

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Jammu-Kashmir: Bhaderwah reverberated with the cheers of Bham-bham, holy stick yatra left for Kailash Kund
कैलाश कुंड - फोटो : फाइल, अमर उजाला

इस तीर्थयात्रा को सबसे कठिन यात्राओं में से एक माना जाता है।

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Jammu-Kashmir: Bhaderwah reverberated with the cheers of Bham-bham, holy stick yatra left for Kailash Kund
भद्रवाह से कैलाश कुंड छड़ी मुबारक (फाइल फोटो)) - फोटो : अमर उजाला

इसके लिए तीर्थयात्रियों को समुद्र तल से 14700 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र कैलाश कुंड (झील) तक पहुंचने के लिए 21 किमी खड़ी पर्वत श्रृंखला की चढ़ाई करनी पड़ती है। जहां पहुंच कर श्रद्धालु भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कैलाश कुंड के बर्फीले पानी में डुबकी लगाते हैं।

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