जम्मू-कश्मीर: बम-बम भोले के जयकारों से गूंजा भद्रवाह, पवित्र छड़ी यात्रा कैलाश कुंड के लिए रवाना
शनिवार को भद्रवाह से रवाना हुई छड़ी सोमवार सुबह समुद्र तल से 14700 फुट की ऊंचाई पर स्थित झील पर पहुंचेगी। पूर्व एमएलसी और वासुकी नाग मंदिर वासिक डेरा के वजीर ने बताया कि वासुकी नाग समस्याओं का समाधान करेंगे।
स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड शिव का मूल निवास था, लेकिन भगवान शिव ने इसे वासुकी नाग को दे दिया और स्वयं भरमौर (हिमाचल प्रदेश) के मणिमहेश में रहने चले गए। कैलाश यात्रा जो श्रावण पूर्णिमा के 14वें दिन शुरू होती है।
इस तीर्थयात्रा को सबसे कठिन यात्राओं में से एक माना जाता है।
इसके लिए तीर्थयात्रियों को समुद्र तल से 14700 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र कैलाश कुंड (झील) तक पहुंचने के लिए 21 किमी खड़ी पर्वत श्रृंखला की चढ़ाई करनी पड़ती है। जहां पहुंच कर श्रद्धालु भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कैलाश कुंड के बर्फीले पानी में डुबकी लगाते हैं।
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