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देश के इस हिस्से में खून चूसने वाले जोंक से होता है इलाज

Fri, 25 Mar 2016 02:24 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 25 Mar 2016 02:24 PM IST
In this part of the country is treated with leech
leech - फोटो : Getty Images

खून चूसने के लिए कुख्यात माने जाने वाले जोंक से इन दिनों कश्मीर घाटी में गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। वैसे तो ये बात सुनने में थोड़ी अटपटी लगती है, लेकिन ये शत प्रतिशत सही है। 

In this part of the country is treated with leech
leech - फोटो : Getty Images

यही नहीं जोंक से इलाज करने वाले और इलाज करवाने वाले दोनों दावा कर रहे हैं कि इस ‌इलाज के परिणाम अद्भुत हैं। कश्मीर के किस हिस्से में ये इलाज होता है और कौन से लोग जोंक से इलाज करवाते हैं, ये बताने से पहले हम आपको थोड़ा पीछे 19वीं सदी में ले जाना चाहते हैं।

In this part of the country is treated with leech
leech - फोटो : Getty Images
19वीं सदी के अंत तक जोंक का उपयोग दवा की तरह किया जाता था। एक ओर प्राचीन ग्रीस से शुरू हुई इस पद्धत‌ि को भारत के कुछ डॉक्टरों द्वारा मान्यता दी गई हुई है तो वहीं दूसरी ओर कुछ डॉक्टरों द्वारा इलाज की इस पद्धति की लगातार आलोचना की जा रही है। 
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In this part of the country is treated with leech
leech - फोटो : Getty Images
समय बदलने के साथ जैसे-जैस देश में बड़े-बड़े अस्पताल खुलते गए और आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचती गई वैसे वैसे इलाज की ये पद्धति खत्म होती गई, लेकिन आज भी कश्मीर घाटी समेत देश के कई अन्य हिस्सों में इस पद्धति से इजाल किया जाता है।
In this part of the country is treated with leech
leech - फोटो : Getty Images
जोकों को प्रभावित अंग के ऊपर छोड़ दिया जाता है। जोंक शरीर से 5 मिलीलीटर तक दूषित खून को चूस लेती है। ये प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक पूरा दूषित खून जोंक चूस न लें। 
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