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घाटी में अब आतंकियों नहीं शहीदों के जनाजे में उमड़ती है भीड़, देखें तस्वीरें

Wed, 07 Oct 2020 05:04 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 07 Oct 2020 05:04 PM IST
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Hundreds of people attended the funeral of policeman Altaf Hussain who was martyr in Ganderbal
शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन की अंतिम विदाई में शामिल हुआ लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala

कश्मीर घाटी में अब फिजा में बदलाव देखने को मिल रहा है। वो कश्मीर जहां हर आतंकी के जनाजे में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती थी, राष्ट्र विरोधी नारेबाजी हुआ करती थी। आज उसी कश्मीर में शहीद जवानों के जनाजों में सैकड़ों लोग शामिल होते दिखाई पड़ते हैं।


 

Hundreds of people attended the funeral of policeman Altaf Hussain who was martyr in Ganderbal
शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन की अंतिम विदाई में शामिल हुआ लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala

हालांकि, कश्मीर में कोरोना महामारी के चलते लोगों के एक जगह जमा होने पर पाबन्दियां लगाई गई है, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। ऐसी ही एक मिसाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के श्रीनगर के ईदगाह स्थित घर पर देखने को मिली, जब उनके जनाजे में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन मंगलवार शाम गांदरबल जिले के नुनर इलाके में भाजपा नेता को बचाने में आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे। 
 

Hundreds of people attended the funeral of policeman Altaf Hussain who was martyr in Ganderbal
शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन की अंतिम विदाई में शामिल हुआ लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala

जनाजे में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि अल्ताफ मेरा भाई था जिसने अपनी जान अपने फर्ज के लिए न्योछावर कर दी है। हमें उसकी शहादत पर गर्व है। उसने कहा कि अल्ताफ एक जिंदा दिल इंसान था और हमेशा से ही उसे पुलिस में जाने का शौक था। पिछले कुछ समय से भाजपा नेताओं को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद परिवार वालों ने कई बार उसे भाजपा नेताओं के साथ न रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह हमेशा कहता था मैं ठीक हूं और अपनी ड्यूटी सही से अंजाम दे रहा हूं, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं। 
 

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Hundreds of people attended the funeral of policeman Altaf Hussain who was martyr in Ganderbal
शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन की अंतिम विदाई में शामिल हुआ लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala

परिवार में अकेले कमाने वाले थे अल्ताफ
आतंकी हमले में शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिवार में उसकी मां, उसकी पत्नी, 18 माह का बेटा, दो छोटे भाई हैं। वहीं दो बहनों की शादी हो चुकी है। अल्ताफ ही परिवार में एक मात्र कमाने वाला था।  
 

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Hundreds of people attended the funeral of policeman Altaf Hussain who was martyr in Ganderbal
शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन की अंतिम विदाई में शामिल हुआ लोगों का हुजूम - फोटो : amar ujala

इस वर्ष आतंकी हमलों में 22 जवान हो चुके हैं शहीद
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अब तक सुरक्षाबलों पर 91 हमले हो चुके हैं।  इनमें से से 34 अर्द्ध्र सैनिक बलों, 25 जम्मू-कश्मी पुलिस, 24 जनप्रतिनिधियों, सेना पर सात और एक बैंक गार्ड पर हुए हैं। इन हमलों में 19 नागरिक और जनप्रतिनिधि, 10 अर्द्ध सैनिक बलों के जवान, 9 पुलिस कर्मी और सेना के तीन जवान शहीद हो चुके हैं।

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