रमजान के पाक महीने का तीसरा अशरा शुरू हो गया है। तीसरे अशरे (रमजान माह के आखिरी 10 दिन) में मुस्लिम समुदाय के लोग एतकाफ (अज्ञातवास) में बैठते हैं और दुनियावी चीजों से खुद को अलग करके सिर्फ दिन-रात अल्लाह की इबादत करते हैं। एतकाफ के लिए पुरुष मस्जिदों में पर्दा लगाकर बैठते हैं, जबकि महिलाएं घर के किसी कोने में पर्दा लगाकर बैठती हैं। हालांकि, इस बार कोरोना वायरस की वजह से मस्जिदें बंद हैं। ऐसे में पुरुष मस्जिदों में एतकाफ के लिए नहीं बैठ सकेंगे।
एतकाफः रमजान माह का तीसरा अशरा शुरू, दुनियावी चीजों से दूर होकर अल्लाह की इबादत के दिन
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हदीस पाक में बताया गया है कि रमजान में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब भी एतकाफ में बैठ थे। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, एतकाफ में बैठकर इबादत करने वालों के अल्लाह सभी गुनाह (पाप) माफ कर देता है। उनकी हर जायज दुआ को पूरा करता है। उलेमाओं के अनुसार रमजान के आखिर में एतकाफ में बैठने वालों पर अल्लाह की रहमत बरसती है।
मुस्लिम समुदाय के लोग 20वें रोजे को असिर-मगरिब की नमाज के बीच एतकाफ में बैठते हैं और आखिरी रोजे (29 या 30) को ईद का चांद दिखने पर निकलते हैं। एतकाफ के दौरान पुरुष-महिलाएं 10 दिन तक एक ही जगह पर खाते-पीते, उठते-बैठते और सोते-जागते हैं।
पूरे 10 दिन तक पाबंदी से रोजा रखते हैं। नमाज-कुरान पढ़कर अल्लाह की इबादत करते हैं। तारावीह पढ़ते हैं यानी खुद को हर चीज से दूर करके सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। हालांकि, एतकाफ में बाथरूम या वॉशरूम जाने की इजाजत होती है।
रमजान माह इस्लाम में सबसे पाक माना गया है। कुरान पाक में यहां तक कहा गया है कि एतकाफ में जिस मस्जिद या घर में कोई बैठता है, तो उस घर के आसपास के रहने वाले तक के गुनाह अल्लाह ताला माफ करते हैं। इस समय लॉकडाउन चल रहा है। सरकार की तरफ से भी कई तरह की पाबंदियां हैं, यह पाबंदियां इसलिए हैं कि लोगों की जिंदगी को बीमारी से बचाया जाए। ऐसे में सभी इसका पालन करें और घरों में रहकर इबादत करें। -मुफ्ती फारूक कासमी, इमाम व खतीब, जामिया मस्जिद, बाड़ी ब्राह्मणा