आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर नवीद बाबू व दो अन्य आतंकियों के साथ गिरफ्तार डीएसपी दविंदर सिंह मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथों में ले ली है। गृह मंत्रालय के आदेश के बाद शनिवार को इस मामले की दोबारा एफआईआर दर्ज की गई। उसके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। मुकदमा दर्ज करने के बाद एजेंसी ने जांच शुरू की। एनआईए ने अब तक विभिन्न जांच एजेंसियों की ओर से जुटाए गए सबूत, दस्तावेज और डिजिटल सबूत अपने कब्जे में ले लिए हैं।
डीएसपी की कलंक कथाः मंदिर की जमीन हड़पने का भी है आरोप, कश्मीरी पंडितों ने दर्ज कराया था मुकदमा
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यह भी पता चला है कि कश्मीरी पंडितों की ओर से भी डीएसपी के खिलाफ जमीन हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। वर्ष 2017 में कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति की ओर से सोनवार में मंदिर की जमीन हड़पने का मुकदमा दर्ज कराते हुए दविंदर के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया था।
सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में सामने आया है कि पिछले साल डीएसपी दविंदर सिंह तीन बार बांग्लादेश का दौरा किया था। यहां वह तीनों बार कुछ दिनों के लिए रुका था। आशंका जताई जा रही है कि बांग्लादेश में ही वह आईएसआई के संपर्क में आया। उसके बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। विदेश से पैसों के लेन-देन का पता लगाने के लिए खातों की छानबीन की जा रही है। पता चला है कि उसकी दो बेटियां बांग्लादेश में पढ़ाई कर रही है। बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी आईएसआई की ओर से वहन किए जाने का शक है।
दविंदर को शनिवार को कुलगाम से जेआईसी श्रीनगर लाकर एनआईए ने कस्टडी में लिया। इसके बाद उससे विभिन्न पहलुओं को आधार बनाकर पूछताछ की गई। यहां उसे कस्टडी में लिया गया। सोमवार को एनआईए टीम उसे दिल्ली ले जा सकती है। उसके खिलाफ यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) तथा आर्म्स एक्ट में मामले दर्ज किए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि एनआईए की ओर से आतंकियों से सांठगांठ तथा अन्य मामलों पर पूछताछ की गई। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किस प्रकार से आतंकियों की मदद करता रहा है? आतंकियों को बाहर ले जाने का मकसद क्या था? पाकिस्तान या खालिस्तानी आतंकियों से कोई संबंध तो नहीं रहा है?
ज्ञात हो कि एक सप्ताह पहले डीएसपी दविंदर सिंह हिजबुल कमांडर नवीद बाबू व दो अन्य आतंकियों के साथ वाहन में मीर बाजार इलाके में पकड़ा गया था। पूछताछ में नवीद को चंडीगढ़ ले जाने तथा वहां कुछ महीनों तक रुकने के लिए 12 लाख रुपये लिए जाने की बात सामने आई थी। यह भी पता चला था कि वह पहले भी नवीद को लेकर जम्मू आया था और यहां स्वास्थ्य लाभ के बाद उसे शोपियां तक सुरक्षित पहुंचाया था।